विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और हमारी धार्मिक परंपरा में भोजन करते समय दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है — यह पितरों और मृत्यु से जुड़ी दिशा है। इसीलिए इस दिशा में मुँह करके भोजन करना अशुभ माना जाता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से आयु कम होती है, दुर्भाग्य बढ़ता है, आर्थिक कठिनाइयाँ आती हैं और कर्ज बढ़ने की आशंका रहती है। इस दिशा में भोजन करने वाले को जीवन में बार-बार स्वास्थ्य समस्याएं और नकारात्मकता का सामना करना पड़ सकता है।
हालाँकि एक विशेष उल्लेख भी मिलता है — जिनके माता-पिता जीवित हों उन्हें दक्षिण में भोजन नहीं करना चाहिए, लेकिन जिनके माता-पिता का स्वर्गवास हो चुका हो वे पितृ-श्राद्ध और पिंडदान के समय दक्षिण दिशा में बैठते हैं।
भोजन के लिए सबसे शुभ दिशा पूर्व और उत्तर मानी गई है। पूर्व दिशा में मुख करके भोजन करने से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। उत्तर दिशा में मुख करके भोजन करने से धन-समृद्धि में वृद्धि होती है। पश्चिम दिशा को भी स्वीकार्य माना जाता है, लेकिन दक्षिण सर्वथा वर्जित है।





