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विस्तृत उत्तर
पितृ कर्म में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण और पिण्डदान करने का विधान बताया गया है।
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पितृ कर्म में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण और पिण्डदान करने का विधान बताया गया है।
दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें।
पितृ कर्म में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण और पिण्डदान करने का विधान बताया गया है।
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