लोकनवमी श्राद्ध में ब्राह्मण भोज क्यों जरूरी है?यह श्राद्ध का मुख्य अंग है।#ब्राह्मण भोज#नवमी श्राद्ध#श्राद्ध विधि
लोकअष्टमी श्राद्ध में कौन से देव पहले पूजे जाते हैं?विष्णु स्मरण और काम-काल विश्वेदेव।#विष्णु#विश्वेदेव#श्राद्ध विधि
लोकअष्टमी श्राद्ध में पिण्ड कैसे बनाते हैं?चावल, जौ, दूध, घी, शक्कर और मधु से।#पिण्डदान#पिण्ड#श्राद्ध विधि
लोकअष्टमी श्राद्ध में कौन सा मुख रखना चाहिए?दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें।#दक्षिण दिशा#तर्पण#श्राद्ध विधि
लोकसप्तमी श्राद्ध कैसे करें?स्नान, संकल्प, पिण्डदान, तर्पण, पंचबलि और ब्राह्मण भोजन से सप्तमी श्राद्ध करें।#सप्तमी श्राद्ध कैसे करें#श्राद्ध विधि#पितृ तर्पण
लोकश्राद्ध में सफेद वस्त्र क्यों पहनें?सफेद वस्त्र श्राद्ध की शुद्धता और सात्विकता के लिए धारण किए जाते हैं।#सफेद वस्त्र#श्राद्ध विधि#शुद्धता
लोकदक्षिण मुख होकर श्राद्ध क्यों करें?पितृ कर्म के लिए दक्षिण दिशा को मुख्य माना गया है।#दक्षिण मुख#श्राद्ध विधि#पितृ दिशा
लोकतृतीया श्राद्ध कैसे करें?संकल्प, तर्पण, पिण्डदान, पंचबलि और ब्राह्मण भोजन से तृतीया श्राद्ध करें।#तृतीया श्राद्ध कैसे करें#श्राद्ध विधि#पितृ तर्पण
श्राद्ध विधियज्ञोपवीत (जनेऊ) श्राद्ध में कैसे पहनें?श्राद्ध में जनेऊ अपसव्य अवस्था में पहना जाता है, अर्थात् दाएं कंधे पर और बाएं हाथ के नीचे। यह देव कार्य के सव्य बाएं कंधे पर से भिन्न है। शास्त्रों ने इसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण कहा है। पितरों का तर्पण इसी अवस्था में किया जाता है।#जनेऊ#अपसव्य#यज्ञोपवीत
लोकपितृ तीर्थ किसे कहते हैं?अंगूठे और तर्जनी के बीच का भाग पितृ तीर्थ कहलाता है।#पितृ तीर्थ#तर्पण जल#अंजलि
लोकपितृ कार्य में अपसव्य मुद्रा क्यों रखी जाती है?पितृ कार्य में जनेऊ दाएँ कंधे पर रखी जाती है, जिसे अपसव्य मुद्रा कहा जाता है।#अपसव्य#जनेऊ#पितृ कार्य
लोकपितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके क्यों किया जाता है?पितरों और यमराज का संबंध दक्षिण दिशा से माना गया है, इसलिए पितृ तर्पण दक्षिणाभिमुख होता है।#दक्षिण दिशा#पितृ तर्पण#यमराज
श्राद्ध एवं पितृकर्मश्राद्ध में अर्घ्य देने की विधि क्या है?श्राद्ध में अर्घ्य (तर्पण) की विधि में दक्षिण मुख, अपसव्य स्थिति में, तांबे-चाँदी के पात्र में जल-तिल-कुश मिलाकर पितरों का नाम-गोत्र लेते हुए जल छोड़ा जाता है। अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना गया है।#अर्घ्य#श्राद्ध विधि#तर्पण