विस्तृत उत्तर
श्राद्धकर्ता को शुद्ध स्थान पर कुशा, रेशम या ऊन के आसन पर बैठना चाहिए। लोहे के आसन का प्रयोग वर्जित है।
नवमी श्राद्ध में श्राद्धकर्ता कैसे बैठे को संदर्भ सहित समझें
नवमी श्राद्ध में श्राद्धकर्ता कैसे बैठे का सबसे सीधा सार यह है: कुशा, रेशम या ऊन के आसन पर।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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मंत्र जप में दिशा और आसन का चयन कैसे करें?
दिशा: पूर्व=सामान्य, उत्तर=ज्ञान/मोक्ष, दक्षिण=पितृ। आसन: कुश=सर्वोत्तम (गीता 6.11), ऊनी कंबल, रेशम। खुली भूमि=वर्जित (ब्रह्माण्ड पुराण)। रंग: पीला=ज्ञान, लाल=शक्ति, काला=तांत्रिक, श्वेत=शांति।
मंत्र जप में रेशमी आसन का प्रयोग कब करें?
देवी साधना (लक्ष्मी/दुर्गा/ललिता), विशेष अनुष्ठान, श्री विद्या। ऊर्जा कुचालक, सात्विक। लाल/गुलाबी। क्रम: कुश>मृगछाला>ऊनी>रेशमी>कपास। अहिंसा प्रश्न → विकल्प: ऊनी।
बिना आसन के मंत्र जप का फल
बिना आसन के नंगी जमीन पर बैठकर जप करने से पृथ्वी सारी आध्यात्मिक ऊर्जा सोख लेती है, जिससे जप निष्फल हो जाता है। ऊर्जा संरक्षण के लिए कुशा या ऊनी आसन अनिवार्य है।
मंत्र की ऊर्जा को शरीर में कैसे रखें
कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करें, जप के बाद आसन के नीचे जल गिराकर मस्तक पर लगाएं और अंत में सारा जप ईश्वर को अर्पित कर दें ताकि ऊर्जा बिखरने न पाए।
सूर्य नमस्कार 12 मंत्र कौन से?
12 मंत्र: मित्राय, रवये, सूर्याय, भानवे, खगाय, पूष्णे, हिरण्यगर्भाय, मरीचये, आदित्याय, सवित्रे, अर्काय, भास्कराय — नमः। 12 आसन=पूर्ण शरीर। प्रतिदिन 12 चक्र।
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