विस्तृत उत्तर
महर्लोक की भौतिक संरचना पृथ्वी या स्वर्ग के किसी भी भौतिक लोक से सर्वथा भिन्न है। यह स्वर्णिम या किसी पार्थिव धातु या मिट्टी की न होकर विशुद्ध चिन्मय और मनोमय (Mind-born/Mental plane) तत्त्वों से निर्मित मानी गई है जो ध्यान और संकल्प शक्ति के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती है। चिन्मय का अर्थ है चेतना से निर्मित और मनोमय का अर्थ है मन से उत्पन्न। यह संरचना इतनी सूक्ष्म और चेतनात्मक है कि केवल उन महान सिद्धों, प्रजापतियों और मुनियों द्वारा ही अनुभव की जा सकती है जो अपनी तपोबल से प्राप्त अष्ट-सिद्धियों से युक्त हैं। यहाँ की ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत सिद्ध योगियों और महर्षियों का आन्तरिक तपोबल और साक्षात् दैवीय प्रकाश है न कि कोई बाहरी भौतिक तत्त्व।
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