विस्तृत उत्तर
योगशास्त्र में विशुद्ध चक्र कण्ठ (गले) के क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र है। यह मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों में से पाँचवाँ चक्र है। विशुद्ध चक्र को सत्य, पवित्रता और उच्चतर पारमार्थिक चेतना का मुख्य द्वार माना जाता है। जब यह चक्र जाग्रत होता है तो साधक की वाणी में असाधारण शक्ति आ जाती है और वह उच्चतर आध्यात्मिक सत्यों को स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त कर सकता है। गरुड़ पुराण के पिण्ड-ब्रह्माण्ड तादात्म्य में इस विशुद्ध चक्र को महर्लोक का सूक्ष्म प्रतिनिधित्व माना गया है। जिस प्रकार महर्लोक भौतिक त्रैलोक्य और आध्यात्मिक अविनाशी लोकों के बीच सेतु है उसी प्रकार विशुद्ध चक्र निचले भौतिक चक्रों और उच्चतर आध्यात्मिक चक्रों (आज्ञा और सहस्रार) के बीच सेतु है।
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