विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड पुराण और वायु पुराण के अत्यंत सूक्ष्म मन्वन्तर विवरणों के अनुसार जब एक मन्वन्तर समाप्त होता है तो उस मन्वन्तर के शासक देव और ऋषि अपने अधिकार पदों से मुक्त होकर विश्राम और परब्रह्म के ध्यान हेतु महर्लोक में ही आ जाते हैं। ये वे महान आत्माएं हैं जिन्होंने एक पूरे मन्वन्तर (लगभग 30 करोड़ 67 लाख वर्ष) तक सप्तर्षि, मनु या इन्द्र के पद पर रहकर ब्रह्माण्ड का प्रशासन किया होता है। ब्रह्माण्ड पुराण इन निवासियों की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहता है कि इनका आध्यात्मिक तेज साक्षात् सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के समान होता है। ये ऋषि महर्लोक में आकर सत्यलोक जाने की शांतिपूर्वक प्रतीक्षा करते हैं और तब तक परब्रह्म के ध्यान में लीन रहते हैं।
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