विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड पुराण में महर्लोक के निवासियों के पाँच महान आध्यात्मिक ऐश्वर्यों में तीसरा ऐश्वर्य 'स्थिति' (Sthiti) है जो अत्यंत असाधारण और दुर्लभ है। स्थिति का अर्थ है — बिना किसी विक्षेप या विचलन के एक ही स्थिर अवस्था में सम्पूर्ण कल्प के अंत तक ध्यान-मग्न स्थित रहना। यह स्थिरता किसी साधारण व्यक्ति के लिए कल्पनातीत है। एक पूर्ण कल्प अर्थात् 4 अरब 32 करोड़ मानवीय वर्षों तक एक ही अटूट ध्यान-अवस्था में रहना — इसका अर्थ है कि इन ऋषियों की चेतना इतनी स्थिर और स्थापित है कि काल, प्रकृति या ब्रह्मांडीय घटनाओं का कोई भी प्रभाव उन्हें उनके ध्यान से नहीं हटा सकता। यह स्थिति साधारण योगियों द्वारा प्राप्त की जाने वाली कुछ घंटों या दिनों की समाधि से असीम रूप से उच्च कोटि की है। यह महर्लोक की विशुद्ध सात्त्विक प्रकृति का सबसे बड़ा प्रमाण है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





