विस्तृत उत्तर
ब्रह्माण्ड पुराण में महर्लोक के निवासियों के पाँच महान आध्यात्मिक ऐश्वर्यों में पाँचवाँ और सर्वोच्च ऐश्वर्य 'दर्शन' (Darshana) है। इस दर्शन का अर्थ है — परब्रह्म परमात्मा का प्रत्यक्ष, स्पष्ट और निर्बाध विज़न (Vision)। यह वह अवस्था है जहाँ साधक ब्रह्माण्डीय सत्य को किसी अप्रत्यक्ष या अनुमान से नहीं बल्कि सीधे और प्रत्यक्ष रूप से देख और अनुभव करता है। महर्लोक के ऋषियों को परब्रह्म का यह प्रत्यक्ष दर्शन निरंतर और निर्बाध रूप से होता रहता है — अर्थात यह कभी खंडित या रुकता नहीं। यह दर्शन साधारण मनुष्यों के ध्यान में होने वाले क्षणिक आध्यात्मिक अनुभवों से सर्वथा भिन्न और उच्च कोटि का है। यही कारण है कि इन महर्षियों का आध्यात्मिक तेज और प्रभाव साक्षात् सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के समान होता है।
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