विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण, भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि महर्लोक में महर्षि भृगु जैसे महान प्रजापति निवास करते हैं। महर्षि भृगु सृष्टि के आरम्भ में स्वयं ब्रह्मा जी के मानस पुत्र के रूप में उत्पन्न हुए थे। भृगु वंश के अन्य प्रतापी और तेजस्वी ऋषि जैसे महर्षि च्यवन (जिनकी पत्नी सुकन्या के प्रसंग से अश्विनी कुमारों की कथा जुड़ी है), और्व (जिनकी आंखों से अग्नि उत्पन्न हुई), जमदग्नि (परशुराम के पिता) और दैत्यगुरु शुक्राचार्य का भी इस लोक से अत्यंत घनिष्ठ संबंध रहा है। भृगु वंश का महर्लोक से यह गहरा संबंध इस बात का प्रमाण है कि इस वंश के ऋषियों ने पीढ़ियों तक अत्यंत उच्च कोटि की तपस्या और निष्काम कर्म किए जो उन्हें इस दुर्लभ लोक का अधिकारी बनाते हैं।
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