विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार त्रैलोक्य को भस्म करने वाली प्रलय की अग्नि केवल सूर्य से ही नहीं अपितु ब्रह्माण्ड के सबसे निचले तल (पाताल) के मूल में स्थित भगवान शेषनाग (सङ्कर्षण) के मुख से उत्पन्न होती है जिसे सङ्कर्षण की अग्नि या कालानल कहा जाता है। सङ्कर्षण (शेषनाग या अनन्त देव) भगवान विष्णु के बलराम स्वरूप का ब्रह्मांडीय रूप हैं जो समस्त ब्रह्माण्ड को अपने फनों पर धारण करते हैं। यह अग्नि पाताल के एकदम नीचे से उत्पन्न होकर ऊपर की ओर उठती है। इस प्रकार इस प्रलयंकारी अग्नि का उद्गम ब्रह्माण्ड के सबसे निचले बिंदु (पाताल में शेषनाग का मुख) से होता है और यह ऊपर उठकर भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक को क्रमशः भस्म करती है। विष्णु पुराण के छठे अंश (६.३.२८-२९) में इस कालानल और महर्लोक के संताप का विस्तृत वर्णन है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





