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संकर्षण प्रश्नोत्तरी — 13 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित संकर्षण विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 13 प्रश्न

लोक

विष्णु पुराण के छठे अंश में महर्लोक के संताप का वर्णन क्या है?

विष्णु पुराण (६.३.२८-२९) में वर्णन है कि संकर्षण की अग्नि का भयंकर ताप महर्लोक को संतापित करता है जिससे भृगु आदि महर्षि इसे छोड़कर जनलोक की ओर पलायन करते हैं।

विष्णु पुराण 6.3महर्लोकसंताप
लोक

संकर्षण की अग्नि का उद्गम कहाँ से होता है?

संकर्षण की अग्नि (कालानल) का उद्गम पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग (संकर्षण/अनन्त देव) के मुख से होता है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।

संकर्षणअग्निउद्गम
लोक

संकर्षण की अग्नि से महर्लोक कैसे प्रभावित होता है?

संकर्षण की अग्नि त्रैलोक्य को भस्म करती है और उसका भयंकर ताप महर्लोक तक पहुँचता है। महर्लोक भस्म नहीं होता पर असहनीय ताप से निर्जन हो जाता है।

संकर्षणमहर्लोकताप
लोक

संकर्षण की अग्नि क्या है?

संकर्षण की अग्नि (कालानल) पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है और पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।

संकर्षणकालानलशेषनाग
लोक

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक की क्या स्थिति होती है?

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर संकर्षण की अग्नि के ताप से निर्जन हो जाता है (कृतक)। भृगु आदि ऋषि जनलोक चले जाते हैं। यही कृतकाकृतक प्रकृति है।

नैमित्तिक प्रलयमहर्लोककृतकाकृतक
लोक

संकर्षण की अग्नि क्या है?

संकर्षण की अग्नि (कालानल) भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है और महर्लोक तक ताप पहुँचाती है।

संकर्षणअग्निकालानल
लोक

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक का क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता लेकिन संकर्षण की अग्नि के असहनीय ताप से रहने योग्य नहीं रहता। भृगु आदि ऋषि जनलोक की ओर पलायन कर जाते हैं।

नैमित्तिक प्रलयमहर्लोकताप
लोक

इलावृत वर्ष में भगवान शिव किसकी उपासना करते हैं और क्यों?

इलावृत वर्ष में भगवान शिव चतुर्व्यूह के चतुर्थ अंश 'संकर्षण' की उपासना करते हैं। यह दर्शाता है कि शिव जी भी भगवान विष्णु के संहार-स्वरूप के उपासक हैं।

इलावृत वर्षभगवान शिवसंकर्षण
श्रीमद्भागवत

चतुर्व्यूह भगवान कौन हैं?

नारदजी के मंत्र में वासुदेव, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षण चार नाम चतुर्व्यूह रूप से जुड़े हैं।

चतुर्व्यूहवासुदेवप्रद्युम्न
लोक

संकर्षण रूप क्या है?

संकर्षण विष्णु की प्रलयकारी संहार शक्ति का रूप है।

संकर्षणविष्णुप्रलय
लोक

महातल लोक में मृत्यु का भय कब होता है?

महातल में मृत्यु का भय गरुड़ के आक्रमण, भगवान के काल-रूप या महाप्रलय की अग्नि के समय होता है।

महातल मृत्युगरुड़प्रलय
लोक

नैमित्तिक प्रलय क्या होता है?

नैमित्तिक प्रलय ब्रह्मा के दिन के अंत और रात्रि के आरंभ पर होने वाला प्रलय है।

नैमित्तिक प्रलयप्रलयब्रह्मा
लोक

संकर्षण की अग्नि और सत्यलोक का क्या संबंध है?

संकर्षण की अग्नि नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य को जलाती है और महर्लोक तक पहुँचती है — पर सत्यलोक इससे पूर्णतः सुरक्षित रहता है। योगी इस समय सत्यलोक में शरण लेते हैं।

संकर्षणअग्निसत्यलोक

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।