विस्तृत उत्तर
नैमित्तिक प्रलय में जब प्रलय की अग्नि संकर्षण के मुख से निकलकर ब्रह्माण्ड को भस्म करती है तो कई योगी अपने योग बल से सत्यलोक की ओर सुरक्षित पलायन कर जाते हैं। संकर्षण (शेषनाग का दूसरा नाम) के मुख से उत्पन्न यह कालानल अग्नि पाताल से ऊपर की ओर उठती है और भूर्लोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक को जलाती है। यह अग्नि महर्लोक तक पहुँचती है जिससे वहाँ के ऋषि जनलोक की ओर पलायन करते हैं। परंतु जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक इस अग्नि के प्रभाव से सर्वथा मुक्त रहते हैं क्योंकि ये लोक इतनी ऊँचाई पर हैं कि संकर्षण की अग्नि वहाँ तक नहीं पहुँच पाती।
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