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प्रलय प्रश्नोत्तरी — 73 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रलय विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 73 प्रश्न

लोक

मार्कण्डेय मुनि की तपस्या और महर्लोक के बीच क्या संबंध है?

मार्कण्डेय मुनि की अखंड तपस्या उन्हें महर्लोक का अधिकारी बनाती है। नैमित्तिक प्रलय के एकार्णव में उन्होंने अपने योगबल से विचरण करते हुए भगवान विष्णु के बालक स्वरूप के दर्शन किए।

मार्कण्डेय मुनितपस्यामहर्लोक
लोक

नैमित्तिक और प्राकृतिक प्रलय में महर्लोक की अवस्था में क्या अंतर है?

नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता, केवल निर्जन होता है और ऋषि लौट आते हैं। प्राकृतिक महाप्रलय में महर्लोक सहित सभी 14 लोक पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं।

नैमित्तिकप्राकृतिकप्रलय
लोक

संकर्षण की अग्नि क्या है?

संकर्षण की अग्नि (कालानल) पाताल के मूल में स्थित भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है और पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है।

संकर्षणकालानलशेषनाग
लोक

महर्लोक की 'कृतकाकृतक' प्रकृति का क्या अर्थ है?

कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी (कृतक) + आंशिक रूप से अविनाशी (अकृतक)। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है — यही इसकी मिश्र प्रकृति है।

कृतकाकृतकमहर्लोकविष्णु पुराण
लोक

संकर्षण की अग्नि क्या है?

संकर्षण की अग्नि (कालानल) भगवान शेषनाग के मुख से नैमित्तिक प्रलय में उत्पन्न होती है। यह पाताल से ऊपर उठकर त्रैलोक्य को भस्म करती है और महर्लोक तक ताप पहुँचाती है।

संकर्षणअग्निकालानल
लोक

प्रलय में महर्लोक के ऋषि कहाँ जाते हैं?

नैमित्तिक प्रलय में भृगु आदि महर्षि महर्लोक छोड़कर जनलोक या सत्यलोक की ओर जाते हैं। ब्रह्मा की रात्रि समाप्त होने पर वे पुनः लौट आते हैं।

प्रलयमहर्लोकजनलोक
लोक

महर्लोक को 'कृतकाकृतक' क्यों कहते हैं?

कृतकाकृतक = आंशिक रूप से विनाशी + आंशिक रूप से अविनाशी। नैमित्तिक प्रलय में महर्लोक भस्म नहीं होता (अकृतक) पर निर्जन हो जाता है (कृतक)।

कृतकाकृतकमहर्लोकविष्णु पुराण
लोक

प्रलय के बाद भुवर्लोक का पुनर्निर्माण कैसे होता है?

प्रलय में जलमग्न त्रैलोक्य में नारायण शेषनाग पर शयन करते हैं। जब ब्रह्मा का अगला दिन (कल्प) शुरू होता है तब वे अपने रजोगुण से भुवर्लोक सहित तीनों लोकों का पुनर्निर्माण करते हैं।

प्रलयपुनर्निर्माणभुवर्लोक
लोक

सांवर्तक मेघ क्या होते हैं?

सांवर्तक मेघ प्रलयकालीन विशेष बादल हैं जो भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक के भस्म होने के बाद सौ वर्षों तक भयंकर वर्षा करके पूरे त्रैलोक्य को जलमग्न कर देते हैं।

सांवर्तक मेघप्रलयभुवर्लोक
लोक

महर्लोक प्रलय में नष्ट क्यों नहीं होता जबकि भुवर्लोक नष्ट हो जाता है?

भुवर्लोक कृतक (नश्वर) है इसलिए प्रलय में नष्ट होता है। महर्लोक अकृतक है — अग्नि उसे जला नहीं सकती परंतु ताप से भृगु आदि ऋषि वहाँ से जनलोक चले जाते हैं।

महर्लोकभुवर्लोकप्रलय
लोक

कृतक और अकृतक लोकों में क्या मौलिक अंतर है?

कृतक लोक (भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक) प्रलय में पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। अकृतक लोक (महर्लोक आदि) प्रलय से आंशिक रूप से ही प्रभावित होते हैं।

कृतकअकृतकभुवर्लोक
लोक

प्रलय में भुवर्लोक का क्या होता है?

प्रलय में सात प्रलयंकारी सूर्यों की अग्नि से भुवर्लोक का वायुमंडल पूरी तरह भस्म हो जाता है और फिर सांवर्तक मेघों की वर्षा से यह जलमग्न हो जाता है।

प्रलयभुवर्लोकनैमित्तिक प्रलय
लोक

कृतक त्रैलोक्य क्या होता है?

भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक — ये तीनों मिलकर कृतक त्रैलोक्य कहलाते हैं। 'कृतक' अर्थात विनाशी — ये तीनों प्रलय के समय नष्ट हो जाते हैं।

कृतक त्रैलोक्यभूलोकभुवर्लोक
दिव्यास्त्र

प्रलय के समय संवर्त मेघ क्या होता है?

प्रलय के समय सात विनाशकारी मेघ प्रकट होते हैं जिनमें से एक का नाम 'संवर्त' है। यह मेघ अत्यधिक जल से भरा होता है और सब कुछ डुबो देता है।

संवर्त मेघप्रलयसात मेघ
दिव्यास्त्र

'संवर्त' शब्द का क्या अर्थ है?

संस्कृत में 'संवर्त' का अर्थ है 'प्रलय' या 'कल्पांत' — युग के अंत में होने वाला ब्रह्मांड का संपूर्ण विनाश। इसके अन्य अर्थ 'लपेटना' और 'शत्रु से भिड़ना' भी हैं।

संवर्तशब्द अर्थप्रलय
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र क्या है?

संवर्त अस्त्र यमराज का दिव्यास्त्र है जो प्रलय जैसा विनाश करता है। इसका महाकाव्यों में केवल एक बार प्रयोग हुआ जब भरत ने तीन करोड़ गंधर्वों का संहार किया था।

संवर्त अस्त्रदिव्यास्त्रयमराज
दिव्यास्त्र

ब्रह्मास्त्र चलने से क्या होता है

ब्रह्मास्त्र चलने से भयंकर प्रलयाग्नि उत्पन्न होती है, जीव-जंतु और वनस्पति नष्ट होते हैं, 12 वर्ष दुर्भिक्ष पड़ता है। दो ब्रह्मास्त्रों के टकराने से सम्पूर्ण पृथ्वी के नाश का भय था।

ब्रह्मास्त्र प्रभावप्रलयदुर्भिक्ष
दिव्यास्त्र

पाशुपतास्त्र की सबसे बड़ी शक्ति क्या है?

पाशुपतास्त्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यह पलक झपकते ही संपूर्ण सृष्टि का विनाश कर सकता है। यह ब्रह्मास्त्र से भी शक्तिशाली है।

पाशुपतास्त्रशक्तिसृष्टि विनाश
दिव्यास्त्र

पाशुपतास्त्र क्यों बनाया गया था?

पाशुपतास्त्र दैत्यों के दमन और धर्म की स्थापना के लिए बनाया गया था। युगांत में भगवान शिव इसी से सृष्टि का विनाश करते हैं ताकि नया सृजन हो सके।

पाशुपतास्त्रउद्देश्यधर्म स्थापना
प्रलय वर्णन

प्रलय के समय संसार कैसा था?

प्रलय के समय अनावृष्टि से स्थावर पदार्थ सूख गए, प्राणी सूर्य की किरणों से दग्ध हुए और चारों ओर समुद्र ही समुद्र हो गया।

प्रलयअनावृष्टिसागर
औपसर्गिक ऐश्वर्य

ब्राह्म ऐश्वर्य क्या है?

बिना कारण जगत् की सृष्टि, अनुग्रह, प्रलय, अधिकार, लोकवृत्त प्रवर्तन और संसार का कर्तृत्व ब्राह्म ऐश्वर्य है।

ब्राह्म ऐश्वर्यसृष्टिअनुग्रह
श्रीमद्भागवत

मत्स्य अवतार ने मनु को कैसे बचाया?

चाक्षुष मन्वंतर के अंत में जब लोक समुद्र में डूब रहे थे, भगवान ने मत्स्य रूप लेकर पृथ्वी रूपी नाव पर वैवस्वत मनु की रक्षा की।

मत्स्य अवतारवैवस्वत मनुप्रलय
सृष्टि आरम्भ

प्रलय के बाद ब्रह्मा ने क्या सोचा?

प्रलयकालीन रात बीतने पर ब्रह्मा ने चराचर जगत् को शून्य देखकर सृष्टि करने का विचार किया।

प्रलयब्रह्मासृष्टि विचार
ब्रह्मा काल

ब्रह्मा को नारायण क्यों कहा गया है?

प्रलय की रात में ब्रह्माजी जलराशि में शयन करते हैं, इसलिए उन्हें नारायण कहा गया है।

ब्रह्मानारायणप्रलय

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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