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विस्तृत उत्तर
प्रलयकालीन रात बीतने पर ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ ब्रह्माजी उठे। उन्होंने चराचर जगत् को शून्य देखा और सृष्टि करने का विचार किया। यह नई सृष्टि के आरंभ का संकेत है। इसके बाद सनातन ब्रह्मा वाराह रूप धारण करके जल में डूबी पृथ्वी को निकालते हैं। ब्रह्मा का यह विचार आगे पृथ्वी-उद्धार और लोक-रचना से जुड़ता है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 28-29, श्लोक 59 1/2
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