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विस्तृत उत्तर
प्रलय में भू:, भुव:, स्व: और मह: लोक नष्ट होते हैं। वर्णन में इन चार लोकों का नाम स्पष्ट दिया गया है। समस्त चर-अचर अनन्त समुद्र में विनष्ट हो जाता है और रात्रि में ब्रह्माजी उसी जलराशि में शयन करते हैं। इन लोकों से ऊपर के लोकों का नाश नहीं बताया गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 28, श्लोक 58 1/2
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