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विस्तृत उत्तर
दक्षिणायन को देवताओं की रात इसलिए कहा गया है क्योंकि सूर्य का दक्षिण की ओर संक्रमण देवों की रात्रि बताया गया है। वर्णन में दक्षिणायन को सूर्य का कर्कराशि से धनुराशि तक जाना कहा गया है। उत्तरायण देवताओं का दिन और दक्षिणायन देवताओं की रात मिलकर दिव्य अहोरात्र बनाते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 25, श्लोक 16
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