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विस्तृत उत्तर
मनुष्यों का एक दिन पन्द्रह मुहूर्त का बताया गया है। उसी प्रकार एक रात भी पन्द्रह मुहूर्त की कही गई है। इससे पहले मुहूर्त की गणना तीस कलाओं से की गई है। इस आधार पर मनुष्य का पूरा अहोरात्र पन्द्रह मुहूर्त दिन और पन्द्रह मुहूर्त रात से समझाया गया है। अर्थात् दिन-रात मिलाकर तीस मुहूर्त होते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 25, श्लोक 10
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