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विस्तृत उत्तर
एक कल्प के संदर्भ में एक हजार चतुर्युगी की अवधि बताई गई है। उसी अवधि में चौदह मनु उत्पन्न होते हैं। इसलिए कल्प और मन्वन्तर की गणना चतुर्युगी के बड़े कालचक्र से जुड़ी है। यहाँ चौदह मनुओं का उल्लेख सीधे एक हजार चतुर्युगी की अवधि के साथ आता है। मनु-क्रम इसी दीर्घ कालमान में रखा गया है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 24, श्लोक 5
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