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विस्तृत उत्तर
काष्ठा सूक्ष्म काल-मान है। स्वस्थ मनुष्य के नेत्र के पन्द्रह निमेष जितना समय होता है, उसे एक काष्ठा कहा गया है। आगे इसी गणना में तीस काष्ठाओं की एक कला और तीस कलाओं का एक मुहूर्त बताया गया है। इस तरह काष्ठा मुहूर्त तक पहुँचने वाली काल-गणना की आरंभिक इकाई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 4, PDF पृष्ठ 25, श्लोक 8-9
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