महादेव उपासनामहादेव को प्रणवयुक्त मंत्रों से नमस्कार क्यों करना चाहिए?विष्णु ने ब्रह्मा से कहा कि महादेव का सद्भाव जानकर प्रणवयुक्त साममंत्रों से उन्हें नमस्कार करें, अन्यथा वे क्रोधित हो सकते हैं।#महादेव#प्रणवयुक्त मंत्र#साम मंत्र
शिव मायाऐश्वरी माया क्या है?कल्प में अवशिष्ट सूक्ष्म जीवों और पार्थिव पदार्थों को जाग्रत करने वाली शक्ति ऐश्वरी माया कही गई है।#ऐश्वरी माया#सूक्ष्म जीव#पार्थिव पदार्थ
सनकादि कुमारसनकादि कुमार ज्ञानमार्ग में क्यों गए?जीवन में सुख कम, दुख अधिक, जन्म-मरण बार-बार और भावी अटल जानकर सनक, सनातन और सनन्दन ब्रह्मज्ञान की ओर प्रवृत्त हुए।#सनकादि कुमार#ज्ञानमार्ग#ब्रह्मज्ञान
सनकादि कुमारसनकादि कुमार कौन थे?सनत्कुमार, ऋभु, सनक, सनातन और सनन्दन ब्रह्मा के पुत्र रूप में उत्पन्न कुमार थे, जिनमें सनत्कुमार और ऋभु ऊर्ध्वरेता थे।#सनकादि कुमार#सनत्कुमार#ऋभु
सृष्टि क्रममेरु पर्वत कैसे उत्पन्न हुआ?अति उन्नत स्वर्णपर्वत मेरु स्वर्ण अंड के गर्भावरण से निर्मित बताया गया है।#मेरु पर्वत#स्वर्ण अंड#गर्भावरण
सृष्टि क्रमआकाश और पृथ्वी कैसे बने?स्वर्ण अंड जल में एक हजार वर्ष रहा, फिर वायु से दो भागों में बँटा; एक खंड से आकाश और दूसरे से पृथ्वी बनी।#आकाश#पृथ्वी#स्वर्ण अंड
शिव तत्त्वशिव सगुण और निर्गुण कैसे हैं?विष्णु ने कहा कि महादेव ने अपने को सगुण और निर्गुण दो रूपों में विभाजित किया; निर्गुण अव्यक्त और सगुण महेश्वर रूप में हैं।#सगुण#निर्गुण#महेश्वर
सृष्टि तत्त्वशिव बीजी, ब्रह्मा बीज और विष्णु योनि कैसे हैं?विष्णु ने कहा कि शिव बीजवान् हैं, ब्रह्मा बीज हैं और वे स्वयं योनि हैं; शिव के लिंग से निकला बीज विष्णु की योनि में गिरा।#बीजी#बीज#योनि
शिवमाहात्म्यशिव को जगत का कारण क्यों कहा गया?विष्णु ने शिव को जगत का कारण, प्राचीन पुरुष, सभी कारणों का मूल बीज, निर्विकार और एकमात्र ज्योति कहा।#शिव#जगत कारण#प्राचीन पुरुष
शिवमाहात्म्यविष्णु ने ब्रह्मा को शिव के बारे में क्या बताया?विष्णु ने बताया कि आने वाले प्रभु आदि-अन्तरहित पार्वतीनाथ शिव हैं, जो धर्मस्वरूप, प्रचण्ड, महायोग-प्रदीपक और वरदाता हैं।#विष्णु#ब्रह्मा#शिवमाहात्म्य
महादेव आगमनब्रह्मा ने शिव को देखकर क्या सोचा?ब्रह्मा ने अद्भुत रूप वाले शिव को आते देखकर विष्णु से पूछा कि यह विशाल, दस भुजाओं वाला, त्रिशूलधारी और भयंकर तेजस्वी प्राणी कौन है।#ब्रह्मा#शिव दर्शन#दश भुजा
महादेव आगमनमहादेव के आने पर क्या हुआ?महादेव के आने पर उनके चरणों के वेग से समुद्र की बड़ी बूँदें आकाश तक उठीं और गर्म-शीतल वायु चलने लगी।#महादेव#शूलपाणि#समुद्र
ब्रह्मा-विष्णु संवादब्रह्मा और विष्णु में संघर्ष क्यों हुआ?शिव की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे की महिमा में उलझे, और समुद्र के मध्य उनके बीच संघर्ष चल रहा था।#ब्रह्मा#विष्णु#संघर्ष
ब्रह्मा नामब्रह्मा को पद्मयोनि क्यों कहा गया?विष्णु ने ब्रह्मा से कहा कि वे कमल से उतर आएँ और आज से पद्मयोनि नाम से लोक में प्रसिद्ध होंगे।#ब्रह्मा#पद्मयोनि#नाभिकमल
नाभिकमलब्रह्मा विष्णु की नाभि से बाहर कैसे आए?सभी द्वार बंद देखकर ब्रह्मा ने अत्यन्त सूक्ष्म रूप धारण किया, नाभि में मार्ग पाया और कमलनाल से बाहर आए।#ब्रह्मा#विष्णु नाभि#कमलनाल
उदर में लोकब्रह्मा ने विष्णु के भीतर क्या देखा?ब्रह्मा ने विष्णु के उदर में वही सब लोक देखे जो विष्णु ने उनके उदर में देखे थे, पर वे भी उसका अंत नहीं पा सके।#ब्रह्मा#विष्णु#उदर
उदर में लोकविष्णु ने ब्रह्मा के भीतर क्या देखा?विष्णु ने ब्रह्मा के उदर में अठारह द्वीप, समुद्र, पर्वत, चार वर्ण, सात लोक और स्थावर-जंगम सब कुछ देखा।#विष्णु#ब्रह्मा#उदर
शिव मायाशिव की माया क्या करती है?शिव की माया ब्रह्मा और विष्णु को मोहित करती है; कल्प के आरम्भ में ब्रह्मा का ज्ञान भी उससे नष्ट हो जाता है।#शिव माया#मोह#ब्रह्मा
शिव मायाब्रह्मा और विष्णु एक-दूसरे को क्यों नहीं पहचान पाए?वे महात्मा शिव की माया से मोहित थे, इसलिए ब्रह्मा विष्णु को पहचान नहीं पाए और दोनों अपने-अपने आदिकर्ता भाव में बोलने लगे।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव माया
ब्रह्मा-विष्णु संवादब्रह्मा ने विष्णु से क्या पूछा?ब्रह्मा ने विष्णु से पूछा कि आप कौन हैं और समुद्र के मध्य आश्रय लेकर क्यों सो रहे हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#प्रश्न
प्रलय और विष्णुविष्णु शेषनाग पर कैसे सो रहे थे?प्रलय-सागर में विष्णु हजार फनों वाले शेषनाग की छायायुक्त फण-शय्या पर अनिर्वचनीय योग में स्थित होकर शयन कर रहे थे।#विष्णु#शेषनाग#शेषशय्या
नाभिकमलब्रह्मा का जन्म कमल से कैसे हुआ?विष्णु ने अपनी नाभि से एक विशाल कमल उत्पन्न किया; बाद में ब्रह्मा कमलनाल के सहारे नाभि से बाहर आकर उसी कमल पर शोभित हुए।#ब्रह्मा#कमल जन्म#नाभिकमल
महादेव का उपदेशमहादेव ने विष्णु को क्या आदेश दिया?महादेव ने विष्णु से चराचर जगत का पालन करने, मोह छोड़ने और पितामह ब्रह्मा का पालन करने को कहा।#महादेव#विष्णु#जगत पालन
वरदानविष्णु ने शिव से कौन सा वर मांगा?विष्णु ने वर माँगा कि ब्रह्मा और विष्णु दोनों की महादेव के प्रति सदा दृढ़ भक्ति बनी रहे।#विष्णु#शिव#वरदान
ब्रह्मा-विष्णुब्रह्मा और विष्णु का विवाद क्यों शुभ माना गया?विष्णु ने कहा कि उनका विवाद मंगलकारी हुआ, क्योंकि उसी विवाद को समाप्त करने के लिए महादेव प्रकट हुए।#ब्रह्मा विष्णु विवाद#शुभ विवाद#महादेव प्रकट
ब्रह्मा-विष्णुब्रह्मा और विष्णु शिव से कैसे जुड़े हैं?महादेव ने कहा कि ब्रह्मा उनके दाएँ अंग से और विश्वात्मा विष्णु उनके बाएँ अंग से उत्पन्न हुए हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
शिव तत्त्वशिव सृष्टि, पालन और संहार कैसे करते हैं?महादेव ने कहा कि वे निष्कल परमेश्वर ही ब्रह्मा, विष्णु और भव रूपों में सृजन, पालन और संहार से युक्त हैं।#सृष्टि#पालन#संहार
शिव तत्त्वशिव के तीन रूप कौन से हैं?निष्कल परमेश्वर शिव ब्रह्मा, विष्णु और भव नामों से तीन रूपों में सृजन, पालन और संहार के गुणों से युक्त हैं।#शिव के तीन रूप#ब्रह्मा#विष्णु
शिव भक्तिब्रह्मा और विष्णु को शिव भक्ति कैसे मिली?महादेव के प्रसन्न होने पर विष्णु ने दृढ़ भक्ति का वर माँगा और महादेव ने दोनों को अचल श्रद्धा-भक्ति दी।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव भक्ति
शिव भक्तिशिव भक्ति कैसे प्राप्त होती है?विष्णु ने महादेव से वर माँगा कि उनकी और ब्रह्मा की शिव में सदा दृढ़ भक्ति रहे, और महादेव ने अचल श्रद्धा-भक्ति प्रदान की।#शिव भक्ति#दृढ़ भक्ति#महादेव
लिंग आख्यानलिंग आख्यान पढ़ने से क्या फल मिलता है?शिवलिंग के सामने प्रतिदिन लिंग-आख्यान पढ़ने वाला शिवत्व को प्राप्त होता है।#लिंग आख्यान#शिवत्व#पाठ फल
लिंग आख्यानशिवलिंग के सामने कौन सा पाठ करना चाहिए?शिवलिंग के समक्ष लिंग-आख्यान का प्रतिदिन पाठ करना बताया गया है।#शिवलिंग#लिंग आख्यान#पाठ
लिंग तत्त्वशिवलिंग को लिंग क्यों कहा जाता है?क्योंकि यह समग्र जगत को अपने में लय करता है, इसलिए इसे लिंग कहा गया है।#शिवलिंग#लिंग#जगत का लय
लिंग तत्त्वशिवलिंग का असली अर्थ क्या है?समग्र जगत को अपने में लय करने के कारण इसे लिंग कहा गया है।#शिवलिंग#लिंग अर्थ#लय
शिवलिंग पूजालिंगवेदी क्या होती है?लिंगवेदी महादेवी पार्वती का रूप बताई गई है, जबकि लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित रहते हैं।#लिंगवेदी#पार्वती#महादेवी
शिवलिंग पूजाशिवलिंग में शिव और पार्वती कैसे माने जाते हैं?लिंगवेदी के रूप में महादेवी पार्वती और लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित बताए गए हैं।#शिवलिंग#पार्वती#महेश्वर
शिवलिंग पूजाशिवलिंग पूजा की शुरुआत कैसे हुई?ब्रह्मा-विष्णु को वर देकर महादेव के अन्तर्धान होने के बाद लोकों में शिवलिंग पूजन की प्रसिद्धि फैल गई।#शिवलिंग पूजा#महादेव#ब्रह्मा
शिव नामशिव को वेदशास्त्ररूप क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को वेदशास्त्ररूप, भुवनेशदेव, वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ कहा गया है।#वेदशास्त्ररूप#भुवनेशदेव#वेदगर्भ
शिव नामशिव को महायोगी क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को रोग-विकारशून्य अनन्त, शाश्वत, वरिष्ठ, वारिगर्भ और महायोगी महेश्वर कहा गया है।#महायोगी#महेश्वर#अनन्त शिव
शिव नामशिव को गणों का स्वामी क्यों कहा गया है?स्तुति में शिव को गणों का अधिपति कहा गया है और उसी के साथ उन्हें गंधी तथा गुहा से भी गुह्यतम रुद्र कहा गया है।#गणों के अधिपति#रुद्र#गुह्यतम
स्तोत्र फलपाप शुद्धि के लिए क्या करना चाहिए?सभी पापों की शुद्धि के लिए विष्णु द्वारा कहे गए स्तोत्र का नित्य जप, पाठ और धर्मनिष्ठ ब्राह्मणों को सुनाना चाहिए।#पाप शुद्धि#विष्णु स्तोत्र#नित्य जप
स्तोत्र फलविष्णु स्तोत्र सुनाने से क्या फल मिलता है?विष्णु स्तोत्र को वेदपारगामी ब्राह्मणों को सुनाने वाला भी पापकर्म में लिप्त होने पर ब्रह्मलोक प्राप्त करता है।#विष्णु स्तोत्र#सुनाना#ब्राह्मण
स्तोत्र फलविष्णु स्तोत्र पढ़ने से क्या फल मिलता है?विष्णु स्तोत्र का पाठ करने वाला, पापकर्म में लिप्त होने पर भी, ब्रह्मलोक को प्राप्त करता है।#विष्णु स्तोत्र#स्तोत्र पाठ#पुण्य
शिव नामवेदगर्भ और विश्वगर्भ क्या हैं?वेदगर्भ, गर्भरूप और विश्वगर्भ शिव के नामों के रूप में आए हैं; उन्हें वेदशास्त्ररूप और भुवनेशदेव भी कहा गया है।#वेदगर्भ#विश्वगर्भ#गर्भरूप
शिव रूपशिव के सर्प आभूषण कैसे हैं?शिव को भुजंग कंकण, सर्प बाजूबन्द, सर्प जनेऊ, सर्प कुण्डल, सर्प माला और सर्प कटिसूत्र धारण करने वाला कहा गया है।#सर्प आभूषण#भुजंग#कुण्डल
शिव नामपार्वतीपति और उमापति कौन हैं?पार्वतीपति और उमापति शिव को कहा गया है; उसी स्थान पर उन्हें हिरण्यबाहु और सुवर्णवीर्य भी नमस्कार किया गया है।#पार्वतीपति#उमापति#हिरण्यबाहु
शिव रूपनीलकंठ शिव कैसे हैं?शिव को ज्ञानरूप, ज्ञानगम्य, चैतन्यरूप, नीलकंठ, नीलकेश और शितिकंठ कहा गया है।#नीलकंठ#शितिकंठ#नीलकेश
शिव रूपअर्धनारीश्वर रूप क्या है?अर्धनारीश्वर रूप में शिव को अर्धनारी का शरीर धारण करने वाला, अव्यक्त और ग्यारह रूपों में परिवर्तित स्थाणु कहा गया है।#अर्धनारीश्वर#अव्यक्त#स्थाणु
प्रणव रूपशिव ओंकार और सर्वज्ञ कैसे हैं?स्तुति में शिव को भगवान्, सर्पों के पति, ओंकार और सर्वज्ञ कहा गया है।#ओंकार#सर्वज्ञ#शिव
मोक्षशिव मोक्ष कैसे देते हैं?शिव को मोक्ष, मोक्षरूप और मोक्ष प्रदान करने वाला कहा गया है; साथ ही वे आत्मास्वरूप, स्वामी और व्यापक शिव हैं।#मोक्ष#मोक्षदाता#मोक्षरूप