विस्तृत उत्तर
विष्णु प्रलय-सागर में शेषनाग की शय्या पर शयन कर रहे थे। उस समय चारों ओर जल ही जल और घना अंधकार था। विष्णु शंख, चक्र और गदा धारण किए, नील मेघ के समान वर्ण वाले, कमल जैसे नेत्रों वाले, मुकुटधारी, आठ भुजाओं वाले और विशाल वक्षस्थल वाले बताए गए हैं। वे योगात्मा, योगवित्, सर्वात्मा, नारायण, पुरुषोत्तम और लक्ष्मीपति हैं। उन्होंने हजार फनों से सुशोभित शेषनाग की ओजस्वी, ऊँची और छायायुक्त फण-शय्या बिछाई और उस महान् शेषशय्या पर किसी अनिर्वचनीय योग में स्थित होकर शयन किया।
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