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विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र का सीधा संबंध स्वयं भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप से है। वे ही इसके मूल अधिपति और स्रोत हैं। माना जाता है कि इस अस्त्र का निर्माण धर्म की स्थापना और अधर्मियों के विनाश के लिए एक ऐसी अमोघ शक्ति के रूप में किया गया था जिसका कोई प्रतिकार न हो सिवाय शरणागति के। यह अस्त्र सीधे भगवान नारायण की इच्छा और शक्ति से जुड़ा है और इसीलिए यह अपने ही स्वामी या उनके अवतारों पर प्रभावहीन होता है।
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