ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

विष्णु प्रश्नोत्तरी — 319 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित विष्णु विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 319 प्रश्न

विष्णु मंत्र

नरसिंह मंत्र का जप शत्रु निवारण के लिए कैसे करें?

'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं...' / 'ॐ क्ष्रौं नृसिंहाय नमः'। मंगलवार/शनिवार, संध्या, 108/1008। शत्रु भय, कोर्ट विजय, अभय। हिरण्यकशिपु वध = अत्याचार नाश।

नरसिंहशत्रुनिवारण
लोक

महर्लोक के अधिपति देव कौन हैं?

महर्लोक के अधिपति यज्ञेश्वर हैं जो स्वयं भगवान विष्णु का यज्ञ-स्वरूप है। यज्ञो वै विष्णुः — यज्ञ और विष्णु एक ही हैं।

महर्लोकयज्ञेश्वरअधिपति
विष्णु भक्ति

सुदर्शन मंत्र का जप सुरक्षा के लिए कैसे करें?

'ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि तन्नो चक्रः प्रचोदयात्'। सरल: 'ॐ नमो भगवते सुदर्शनाय नमः' 108। तुलसी माला, बुधवार/गुरुवार। शत्रु से बचाव। दक्षिण भारत में सुदर्शन होम प्रचलित। बिना दीक्षा सरल जप मान्य।

सुदर्शनचक्रसुरक्षा
विष्णु भक्ति

नारायण कवच का पाठ करने की विधि क्या है?

श्रीमद्भागवत (स्कंध 6, अध्याय 8): विश्वरूप→इंद्र। विष्णु के विभिन्न रूपों से प्रत्येक अंग/दिशा रक्षा। प्रातः, शुद्ध उच्चारण, एकादशी/गुरुवार। इंद्र ने इससे दैत्य जीते। बिना दीक्षा सभी पढ़ सकते।

नारायण कवचश्रीमद्भागवतसुरक्षा
मंत्र साधना

विष्णु अष्टाक्षर मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' के लाभ

अष्टाक्षर मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' पूर्ण समर्पण जाग्रत करता है, सभी पापों को नष्ट करता है, विपत्तियों से रक्षा करता है और अंततः साधक को मोक्ष (बैकुंठ) प्रदान करता है।

विष्णुअष्टाक्षरनारायण
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र किसका अस्त्र है?

नारायणास्त्र भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप का अस्त्र है। वे ही इसके मूल अधिपति और स्रोत हैं।

नारायणास्त्रनारायणविष्णु
दिव्यास्त्र

नारायणास्त्र क्या है?

नारायणास्त्र भगवान विष्णु का व्यक्तिगत और अमोघ दिव्यास्त्र है जो त्रिलोकी की अंतिम शक्तियों में से एक है। इसका प्रतिरोध करने पर यह और शक्तिशाली होता है।

नारायणास्त्रविष्णुदिव्यास्त्र
शिव लीला

भस्मासुर की कथा में विष्णु ने मोहिनी रूप क्यों लिया?

भस्मासुर को सीधे नहीं मारा जा सकता था क्योंकि शिव का वरदान था और वह उनका भक्त था। विष्णु ने मोहिनी रूप इसलिए लिया ताकि भस्मासुर को नृत्य में अपना हाथ अपने सिर पर रखवाकर उसे उसी के वरदान से भस्म कराया जा सके।

मोहिनीविष्णुभस्मासुर
लोक

शाल्मल द्वीप में गरुड़ का क्या महत्व है?

शाल्मल द्वीप में विशाल शाल्मली वृक्ष पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव का निवास है। यहाँ के निवासी चंद्र देव की पूजा करते हैं।

शाल्मल द्वीपगरुड़विष्णु
दिव्यास्त्र

वैष्णवास्त्र को कौन निष्प्रभावी कर सकता था?

केवल स्वयं भगवान विष्णु ही वैष्णवास्त्र को निष्प्रभावी कर सकते थे। कोई अन्य दिव्यास्त्र या योद्धा इसका प्रतिकार करने में असमर्थ था।

वैष्णवास्त्रनिष्प्रभावीविष्णु
दिव्यास्त्र

वैष्णवास्त्र किसका व्यक्तिगत अस्त्र है?

वैष्णवास्त्र भगवान विष्णु का व्यक्तिगत अस्त्र है। उनके अवतार श्री राम और श्री कृष्ण के पास भी यही अस्त्र था।

वैष्णवास्त्रविष्णुकृष्ण
दिव्यास्त्र

वैष्णवास्त्र किसने बनाया?

वैष्णवास्त्र के निर्माता स्वयं भगवान विष्णु हैं। यह उनकी इच्छाशक्ति और संकल्प से उत्पन्न हुआ है, किसी तपस्या का परिणाम नहीं।

वैष्णवास्त्रविष्णुनिर्माता
दिव्यास्त्र

वैष्णवास्त्र क्या है?

वैष्णवास्त्र भगवान विष्णु का व्यक्तिगत और अमोघ दिव्यास्त्र है जो धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का प्रतीक है।

वैष्णवास्त्रविष्णुदिव्यास्त्र
दिव्यास्त्र

दिव्यास्त्रों की उत्पत्ति कैसे हुई?

अहिर्बुध्न्य संहिता के अनुसार भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र की शक्ति से धर्म की स्थापना के लिए सौ से अधिक दिव्यास्त्रों का निर्माण किया था।

दिव्यास्त्रउत्पत्तिविष्णु
लोक

लोकालोक पर्वत का ब्रह्मांडीय महत्व क्या है?

लोकालोक पर्वत भूलोक की अंतिम भौतिक सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। यहाँ स्वयं भगवान विष्णु शंख-चक्र-गदा-पद्म धारण किए लोकों की रक्षा हेतु निवास करते हैं।

लोकालोक पर्वतब्रह्मांडीय महत्वविष्णु
लोक

शाल्मलि द्वीप में गरुड़ देव का क्या महत्व है?

शाल्मलि द्वीप में विशाल शाल्मलि वृक्ष पर गरुड़ देव निवास करते हैं और वहाँ से भगवान विष्णु की वेदमयी स्तुति करते हैं। यहाँ के निवासी चंद्र देव की पूजा करते हैं।

शाल्मलि द्वीपगरुड़विष्णु
लोक

लोकालोक पर्वत क्या है?

लोकालोक पर्वत भूमण्डल की सबसे बाहरी सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। यह 10,000 योजन ऊँचा है और यहाँ स्वयं भगवान विष्णु निवास करते हैं।

लोकालोक पर्वतप्रकाश अंधकारभूलोक सीमा
शिव पूजा नियम

शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती, इसका कारण बताएं?

शिवलिंग पर हल्दी वर्जित। कारण: हल्दी = स्त्री सौभाग्य/सौंदर्य प्रतीक, शिव = वैरागी। हल्दी = विष्णु/बृहस्पति से संबंधित (पीतांबर)। रसोई सामग्री, शिव श्मशानवासी। शिवलिंग पर चंदन, भस्म या केसर लगाएं। पार्वती प्रतिमा पर हल्दी स्वीकार्य।

हल्दीशिवलिंगनिषेध
शिव पूजा नियम

शालिग्राम और शिवलिंग की एक साथ पूजा कर सकते हैं या नहीं?

हां — स्मार्त/समन्वयवादी परंपरा में दोनों की एक साथ पूजा वैध। सामग्री भेद रखें: तुलसी = शालिग्राम, बेलपत्र = शिवलिंग। शंख = शालिग्राम, शिवलिंग पर वर्जित। शिवलिंग का निर्माल्य ग्रहण न करें, शालिग्राम का कर सकते हैं। कुछ सम्प्रदायों में भिन्न मत है।

शालिग्रामशिवलिंगविष्णु
यंत्र

सुदर्शन यंत्र से सुरक्षा कैसे मिलती है?

सुदर्शन = विष्णु चक्र (सर्वनाशक)। यंत्र = सुरक्षा कवच — शत्रु/नकारात्मकता नष्ट। सुदर्शन गायत्री 108, पूर्व/उत्तर, तुलसी। दक्षिण भारत: सुदर्शन होम = शक्तिशाली। बिना दीक्षा सरल पूजा मान्य।

सुदर्शनयंत्रविष्णु
दिव्यास्त्र

सुदर्शन चक्र को कैसे चलाया जाता था?

सुदर्शन चक्र को भौतिक बल से नहीं फेंका जाता था। भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के पवित्र संकल्प और इच्छाशक्ति मात्र से यह लक्ष्य की ओर चल पड़ता था।

सुदर्शन चक्रसंकल्पइच्छाशक्ति
दिव्यास्त्र

भगवान शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र क्यों दिया?

असुरों के बढ़ते अत्याचार से देवताओं की रक्षा के लिए विष्णु ने कैलाश पर शिव की कठोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें सुदर्शन चक्र वरदान में दिया।

शिवविष्णुसुदर्शन चक्र
दिव्यास्त्र

सुदर्शन चक्र को और किस नाम से जानते हैं?

सुदर्शन चक्र को 'विष्णु चक्र' भी कहते हैं। यह कालचक्र और ब्रह्मांडीय व्यवस्था पर नियंत्रण का प्रतीक भी है।

सुदर्शन चक्रनामकालचक्र
दिव्यास्त्र

सुदर्शन चक्र किसका अस्त्र है?

सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का अस्त्र है। उनके अवतार श्रीकृष्ण ने भी द्वापर युग में इसे धारण किया था।

सुदर्शन चक्रविष्णुश्रीकृष्ण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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