विस्तृत उत्तर
सुरा (मदिरा) के सागर से घिरे शाल्मलि द्वीप का विस्तार चार लाख योजन है। इस द्वीप में एक अत्यंत विशाल शाल्मलि (सेमल) का वृक्ष स्थित है जो भगवान विष्णु के वाहन पक्षिराज गरुड़ का विश्राम स्थल और निवास है। वहाँ से गरुड़ देव भगवान विष्णु की वेदमयी स्तुति करते हैं। इस प्रकार शाल्मलि द्वीप में गरुड़ देव का महत्व अत्यंत विशेष है क्योंकि यह द्वीप स्वयं भगवान विष्णु के परम प्रिय वाहन का निवास स्थल है। यहाँ के निवासी श्रुतिधर, विद्याधर, वसुन्धर और ईशधर नामक चार वर्णों में विभाजित हैं जो वेदमंत्रों के द्वारा चन्द्र देव की उपासना करते हैं जो वनस्पतियों और मन के स्वामी हैं। इस प्रकार शाल्मलि द्वीप में गरुड़ देव की उपस्थिति इसे विशेष रूप से वैष्णव महत्व प्रदान करती है और यहाँ के निवासी चंद्र देव की उपासना करते हैं।
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