विस्तृत उत्तर
स्वयं भगवान विष्णु के अतिरिक्त कोई भी वैष्णवास्त्र को निरस्त या निष्प्रभाव नहीं कर सकता था। किसी अन्य दिव्यास्त्र में इतनी क्षमता नहीं थी कि वह वैष्णवास्त्र का प्रतिकार कर सके। यह गुण वैष्णवास्त्र को ब्रह्मास्त्र या पाशुपतास्त्र जैसे अन्य महाशक्तिशाली अस्त्रों से भी एक अलग और विशिष्ट श्रेणी में स्थापित करता है जिनके निवारण के लिए अन्य विशेष अस्त्र या विधियाँ वर्णित हैं। महाभारत में जब भगदत्त ने अर्जुन पर वैष्णवास्त्र चलाया तो केवल स्वयं श्री कृष्ण ने उसे अपनी छाती पर लेकर निष्प्रभावी किया।
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