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विष्णु गायत्री मंत्र: दिव्य बुद्धि, शांति व आध्यात्मिक जागरण !
विष्णु

विष्णु गायत्री मंत्र: दिव्य बुद्धि

📿 पौराणिक•1 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 22 मई 2025
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एक वैदिक साधना जो खोलती है भगवान विष्णु के दिव्य ज्ञान और चेतना के द्वार विष्णु गायत्री मंत्र विष्णु गायत्री मंत्र: "ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥" ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ मंत्र का स्रोत यह मंत्र विभिन्न पुराणों एवं आगम ग्रंथों में पाया जाता है, और गायत्री मंत्रों की...

ज्ञान-सार

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विष्णु गायत्री मंत्र

विष्णु गायत्री मंत्र: "ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥"

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

मंत्र का स्रोत

यह मंत्र विभिन्न पुराणों एवं आगम ग्रंथों में पाया जाता है, और गायत्री मंत्रों की श्रेणी में आता है।

सम्बद्ध देव

भगवान् विष्णु।

मंत्र का शब्दार्थ एवं भावार्थ

"ॐ, हम नारायण को जानते हैं (उनके स्वरूप को समझने का प्रयास करते हैं), वासुदेव का ध्यान करते हैं (उनमें अपने चित्त को एकाग्र करते हैं), वह विष्णु हमें सत्कार्यों की ओर प्रेरित करें।" यह मंत्र ज्ञान, बुद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना है।

शास्त्रोक्त फलश्रुति

इस मंत्र के नियमित जप से साधक के जीवन में सकारात्मकता आती है, मानसिक शांति प्राप्त होती है, और आध्यात्मिक उत्थान होता है। यह श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

विस्तृत जप-विधि एवं अनुष्ठान प्रक्रिया

सामान्यतः प्रातःकाल सूर्योदय के समय या संध्याकाल में इस गायत्री मंत्र का जप किया जाता है। शुद्धता का ध्यान रखते हुए, एकाग्रचित्त होकर इसका जप करना चाहिए। गायत्री मंत्रों की श्रेणी में होने के कारण यह विशेष रूप से सात्विक और ज्ञान-वर्धक है। इसका "अल्पज्ञात" पक्ष इसके विभिन्न अवतारों के लिए विशिष्ट रूपों में रूपांतरित होने की क्षमता में है, जैसा कि खंड २ में वर्णित होगा। गायत्री मंत्र का प्रारूप (विद्महे, धीमहि, प्रचोदयात्) एक विशिष्ट वैदिक संरचना है जो ध्यान और प्रज्ञा को जागृत करने के लिए जानी जाती है। विष्णु के विभिन्न नामों (नारायण, वासुदेव) का प्रयोग साधक को उनके विभिन्न पहलुओं से जोड़ता है। यह मंत्र विभिन्न अवतारों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है, जो इसकी बहुमुखी शक्ति को दर्शाता है, जैसे नृसिंह गायत्री ।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

लोक

मानव श्वास और विष्णु की श्वास का संबंध क्या है?

मानव श्वास महाप्राण की धारा है।

लोक

भगवान विष्णु शेषनाग पर क्यों लेटते हैं?

शेषनाग अनंत आधार के प्रतीक हैं, इसलिए विष्णु उन पर शयन करते हैं।

लोक

किसान का श्रम भगवान विष्णु ने क्यों बड़ा माना?

किसान का श्रम उसके जीवन और आशा का आधार था।

लोक

भगवान विष्णु का सृष्टि-संकल्प क्या था?

सृष्टि-संकल्प विष्णु की वह इच्छा है जिससे अव्यक्त जगत प्रकट होता है।

लोक

महामाया विष्णु से कैसे जुड़ी हैं?

महामाया विष्णु की योगनिद्रा और प्राण-शक्ति हैं।

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