ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
भगवान विष्णु के 108 नाम: पाप-नाश, शांति और मोक्ष का 'महामंत्र' !
भगवान

भगवान विष्णु के 108 नाम: पाप-नाश

📿 पौराणिक•6 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 2 जून 2026
तुरंत उत्तर

भगवान विष्णु के 108 नाम – हर नाम में छिपा है दिव्य चमत्कार और शास्त्रीय रहस्य! भगवान विष्णु के 108 नाम भगवान विष्णु के 108 नाम भगवान विष्णु के ये 108 नाम संरक्षण, धर्म, करुणा, विश्वरूप, शांति और मोक्ष के भाव का स्मरण कराते हैं। श्रद्धापूर्वक पाठ करते समय साधक श्रीहरि के सर्वव्यापक और पालनकर्ता...

ज्ञान-सार

अगर पूरा पोस्ट नहीं पढ़ना चाहते, तो यह सारांश पढ़ें — इससे आपको सटीक जानकारी मिलेगी।

क्लिक करते ही लेख के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु एक साफ, छोटे और भरोसेमंद सार में दिखेंगे।

WhatsApp
भगवान विष्णु के 108 नाम

भगवान विष्णु के 108 नाम

भगवान विष्णु के ये 108 नाम संरक्षण, धर्म, करुणा, विश्वरूप, शांति और मोक्ष के भाव का स्मरण कराते हैं। श्रद्धापूर्वक पाठ करते समय साधक श्रीहरि के सर्वव्यापक और पालनकर्ता स्वरूप का ध्यान करता है।

क्रम नाम मन्त्र अर्थ
1 विश्वम् ॐ विश्वस्मै नमः। भगवान जो स्वयं ब्रह्मांड हैं
2 विष्णु ॐ विष्णवे नमः। भगवान जो सर्वत्र व्याप्त हैं
3 वषट्कार ॐ वषट्काराय नमः। भगवान जिन्हें यज्ञों में आहूत किया जाता है
4 भूतभव्यभवत्प्रभुः ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः। भगवान जो भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी हैं
5 भूतकृत ॐ भूतकृते नमः। सभी जीवों के सृजनकर्ता
6 भूतभृत ॐ भूतभृते नमः। सभी प्राणियों के पालनकर्ता
7 भाव ॐ भावाय नमः। परम अस्तित्व
8 भूतात्मा ॐ भूतात्मने नमः। भगवान जो समस्त प्राणियों के आत्मा हैं
9 भूतभावन ॐ भूतभावनाय नमः। भगवान जो हर जीव का पोषण करते हैं
10 पूतात्मा ॐ पूतात्मने नमः। अत्यंत पवित्र स्वरूप वाले भगवान
11 परमात्मा ॐ परमात्मने नमः। परमात्मा
12 मुक्तानां परमागतिः ॐ मुक्तानां परमायै गतये नमः। मुक्त आत्माओं की परम सीमा
13 अव्ययः ॐ अव्ययाय नमः। भगवान जो सदा एक समान हैं
14 पुरुषः ॐ पुरुषाय नमः। जो हर शरीर के भीतर निवास करते हैं
15 साक्षी ॐ साक्षिणे नमः। जो हर घटने वाली घटना के साक्षी हैं
16 क्षेत्रज्ञः ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः। क्षेत्रज्ञ — शरीर और मन के ज्ञाता
17 अक्षर ॐ अक्षराय नमः। जो कभी नष्ट नहीं होते
18 योगः ॐ योगाय नमः। जो योग के माध्यम से जाने जाते हैं
19 योगविदां नेता ॐ योगविदां नेत्रे नमः। योगियों के अग्रणी
20 प्रधानपुरुषेश्वर ॐ प्रधानपुरुषेश्वराय नमः। प्रकृति और प्राणियों के स्वामी
21 नारसिंहवपुः ॐ नारसिंहवपुषे नमः। नरसिंह रूपधारी भगवान
22 श्रीमान् ॐ श्रीमते नमः। जो सदैव श्री लक्ष्मी के साथ हैं
23 केशव ॐ केशवाय नमः। जिनके केश सुंदर हैं
24 पुरुषोत्तम ॐ पुरुषोत्तमाय नमः। परम नियंता
25 सर्व ॐ सर्वस्मै नमः। जो स्वयं सब कुछ हैं
26 शर्व ॐ शर्वाय नमः। प्रलय काल में संहार करने वाले
27 शिव ॐ शिवाय नमः। जो सदैव शुद्ध हैं
28 स्थाणु ॐ स्थाणवे नमः। अचल
29 भूतादि ॐ भूतादये नमः। सभी प्राणियों का स्रोत
30 निधिरव्यय ॐ निधये अव्ययाय नमः। अविनाशी धन
31 सम्भव ॐ सम्भवाय नमः। जो सब घटनाओं का मूल कारण हैं
32 भावन ॐ भावनाय नमः। जो भक्तों को सब कुछ प्रदान करते हैं
33 भर्ता ॐ भर्त्रे नमः। समस्त जीव जगत के शासक
34 प्रभव ॐ प्रभवाय नमः। जिनसे सब कुछ उत्पन्न हुआ
35 प्रभु ॐ प्रभवे नमः। सर्वशक्तिमान भगवान
36 ईश्वर ॐ ईश्वराय नमः। सभी प्राणियों के नियंत्रक और शासक
37 स्वयम्भू ॐ स्वयम्भुवे नमः। स्वयं प्रकट होने वाले
38 शम्भु ॐ शम्भवे नमः। आनंद देने वाले
39 आदित्य ॐ आदित्याय नमः। अदिति पुत्र सूर्यदेव
40 पुष्कराक्ष ॐ पुष्कराक्षाय नमः। कमलनयन भगवान
41 महास्वन ॐ महास्वनाय नमः। गर्जन जैसी वाणी वाले भगवान
42 अनादिनिधन ॐ अनादिनिधनाय नमः। जिनका न आरंभ है न अंत
43 धाता ॐ धात्रे नमः। सभी अनुभूतियों के आधार
44 विधाता ॐ विधात्रे नमः। कर्म और फल के रचयिता
45 धातुरुत्तम ॐ धातुरुत्तमाय नमः। सृजनकर्ता ब्रह्मा से भी महान
46 अप्रमेय ॐ अप्रमेयाय नमः। नियमों और परिभाषाओं से परे
47 हृषीकेश ॐ हृषीकेशाय नमः। इंद्रियों के स्वामी
48 पद्मनाभ ॐ पद्मनाभाय नमः। जिनकी नाभि से ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ
49 अमरप्रभु ॐ अमरप्रभवे नमः। अमर देवताओं के स्वामी
50 विश्वकर्मा ॐ विश्वकर्मणे नमः। ब्रह्मांड के रचयिता
51 मनु ॐ मनवे नमः। जो हर बात का विचार करते हैं
52 त्वष्टा ॐ त्वष्ट्रे नमः। जो बड़े को छोटा बना देते हैं
53 स्थविष्ठ ॐ स्थविष्ठाय नमः। परम विशाल
54 स्थविरो ध्रुव ॐ स्थविराय ध्रुवाय नमः। प्राचीन और सनातन भगवान
55 अग्राह्य ॐ अग्राह्याय नमः। इंद्रियों से अप्राप्य
56 शाश्वत ॐ शाश्वताय नमः। शाश्वत
57 कृष्ण ॐ कृष्णाय नमः। श्याम वर्ण वाले भगवान
58 लोहिताक्ष ॐ लोहिताक्षाय नमः। लाल नेत्रों वाले भगवान
59 प्रतर्दन ॐ प्रतर्दनाय नमः। प्रलय के समय संहार करने वाले
60 प्रभूत ॐ प्रभूताय नमः। धन और ज्ञान से परिपूर्ण
61 त्रिककुब्धाम ॐ त्रिककुब्धाम्ने नमः। सभी दिशाओं के स्वामी
62 पवित्रं ॐ पवित्राय नमः। हृदय को पवित्र करने वाले
63 मङ्गलंपरम् ॐ मङ्गलपराय नमः। परम मंगलस्वरूप
64 ईशान ॐ ईशानाय नमः। सबके शासक
65 प्राणद ॐ प्राणदाय नमः। जीवन देने वाले
66 प्राण ॐ प्राणाय नमः। आत्मा
67 ज्येष्ठ ॐ ज्येष्ठाय नमः। सब से प्राचीन
68 श्रेष्ठ ॐ श्रेष्ठाय नमः। सब से श्रेष्ठ
69 प्रजापति ॐ प्रजापतये नमः। समस्त मनुष्यों के अधिपति
70 हिरण्यगर्भ ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। विश्व के गर्भ में स्थित
71 भूगर्भ ॐ भूगर्भाय नमः। जो पृथ्वी को अपने भीतर धारण करते हैं
72 माधव ॐ माधवाय नमः। लक्ष्मीपति
73 मधुसूदन ॐ मधुसूदनाय नमः। मदु असुर के संहारक
74 ईश्वर ॐ ईश्वराय नमः। नियंत्रक
75 विक्रमी ॐ विक्रमिणे नमः। पराक्रमी भगवान
76 धन्वी ॐ धन्विने नमः। परम धनुर्धर
77 मेधावी ॐ मेधाविने नमः। परम बुद्धिमान
78 विक्रम ॐ विक्रमाय नमः। जिन्होंने तीनों लोकों को नापा (वामन रूप में)
79 क्रम ॐ क्रमाय नमः। जो सर्वत्र व्यापी हैं
80 अनुत्तम ॐ अनुत्तमाय नमः। उनसे बड़ा कोई नहीं
81 दुराधर्ष ॐ दुराधर्षाय नमः। जिन्हें कोई जीत नहीं सकता
82 कृतज्ञ ॐ कृतज्ञाय नमः। जो सभी प्राणियों के कर्म जानते हैं
83 कृति ॐ कृतये नमः। जो हर कर्म का फल देते हैं
84 आत्मवान् ॐ आत्मवते नमः। जो सभी प्राणियों में आत्मरूप हैं
85 सुरेश ॐ सुरेशाय नमः। सभी देवताओं के देव
86 शरणम ॐ शरणाय नमः। शरणदाता
87 शर्म ॐ शर्मणे नमः। अनंत आनंदस्वरूप
88 विश्वरेता ॐ विश्वरेतसे नमः। ब्रह्मांड का बीज
89 प्रजाभव ॐ प्रजाभवाय नमः। मानव अस्तित्व का कारण
90 अह ॐ अह्ने नमः। दिन समान तेजस्वी
91 संवत्सर ॐ संवत्सराय नमः। कालस्वरूप
92 व्याल ॐ व्यालाय नमः। महान सर्प के समान दुर्लभ
93 प्रत्यय ॐ प्रत्ययाय नमः। ज्ञान का मूर्त रूप
94 सर्वदर्शन ॐ सर्वदर्शनाय नमः। सर्वद्रष्टा
95 अज ॐ अजाय नमः। अजन्मा
96 सर्वेश्वर ॐ सर्वेश्वराय नमः। सबका स्वामी
97 सिद्ध ॐ सिद्धाय नमः। सदैव सर्वत्र
98 सिद्धि ॐ सिद्धये नमः। सभी इच्छाओं का परम फल
99 सर्वादि ॐ सर्वादये नमः। सबका मूल कारण
100 अच्युत ॐ अच्युताय नमः। जो कभी त्रुटि नहीं करते
101 वृषाकपि ॐ वृषाकपये नमः। जो धर्म और वराह के स्वरूप हैं
102 अमेयात्मा ॐ अमेयात्मने नमः। जिनकी महिमा का माप नहीं किया जा सकता
103 सर्वयोगविनिःसृत ॐ सर्वयोगविनिःसृताय नमः। जो सभी योगों द्वारा जाने जाते हैं
104 वसु ॐ वसवे नमः। जो हर जीव में निवास करते हैं
105 वसुमना ॐ वसुमनसे नमः। जिनका हृदय अत्यंत पवित्र है
106 सत्य ॐ सत्याय नमः। जो सत्यस्वरूप हैं
107 समात्मा ॐ समात्मने नमः। जो सभी में समान रूप से विद्यमान हैं
108 सम्मित ॐ सम्मिताय नमः। जो सबमें असीम रूप से स्थित हैं

पाठ का सरल भाव

  • प्रत्येक नाम के साथ भगवान विष्णु के पालन, संतुलन और करुणामय स्वरूप का स्मरण करें।
  • एकादशी, गुरुवार, पूर्णिमा या किसी शांत पूजा के समय श्रद्धापूर्वक पाठ शुभ माना जाता है।
  • पाठ से पहले स्वच्छ मन से धर्म, शांति, सद्बुद्धि और कल्याण की प्रार्थना करें।

भावार्थ: विष्णु नाम-जप जीवन में संतुलन, धैर्य, भक्ति और धर्ममय कर्म की प्रेरणा जगाने की साधना है।

स्रोत-सत्यापन: यह 108 नामों की सूची हमारे सत्यापित vishnu_sahasra_namavali संग्रह की क्रम संख्या 1 से 108 तक की प्रविष्टियों से तैयार की गई है।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

लोक

मानव श्वास और विष्णु की श्वास का संबंध क्या है?

मानव श्वास महाप्राण की धारा है।

लोक

भगवान विष्णु शेषनाग पर क्यों लेटते हैं?

शेषनाग अनंत आधार के प्रतीक हैं, इसलिए विष्णु उन पर शयन करते हैं।

लोक

किसान का श्रम भगवान विष्णु ने क्यों बड़ा माना?

किसान का श्रम उसके जीवन और आशा का आधार था।

लोक

भगवान विष्णु का सृष्टि-संकल्प क्या था?

सृष्टि-संकल्प विष्णु की वह इच्छा है जिससे अव्यक्त जगत प्रकट होता है।

लोक

महामाया विष्णु से कैसे जुड़ी हैं?

महामाया विष्णु की योगनिद्रा और प्राण-शक्ति हैं।

📚 इसे भी पढ़ें

नारायणास्त्र: अजेय शक्ति और महाविनाश की संपूर्ण गाथा !
नारायणास्त्र

नारायणास्त्र: अजेय शक्ति और महाविनाश की संपूर्ण गाथा !

शरभ अवतार: नरसिंह का क्रोध और शिव के उग्र रूप की गाथा !
शरभ

शरभ अवतार: नरसिंह का क्रोध और शिव के उग्र रूप की गाथा !

गरुड़ पुराण: मृत्यु, यमलोक और कर्मफल का सम्पूर्ण रहस्य !
गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण: मृत्यु, यमलोक और कर्मफल का सम्पूर्ण रहस्य !

प्रलय और महाप्रलय: 4 प्रकार, विनाश और पुनर्जन्म का रहस्य !
प्रलय

प्रलय और महाप्रलय: 4 प्रकार, विनाश और पुनर्जन्म का रहस्य !

वैष्णवास्त्र: भगवान विष्णु का अमोघ दिव्यास्त्र और उत्पत्ति !
वैष्णवास्त्र

वैष्णवास्त्र: भगवान विष्णु का अमोघ दिव्यास्त्र और उत्पत्ति !

विष्णु यज्ञ अवतार: हरि के इंद्र पद संभालने की कथा !
भगवान

विष्णु यज्ञ अवतार: हरि के इंद्र पद संभालने की कथा !

कपिल मुनि अवतार: सांख्य योग और भक्ति के संगम की कथा !
भगवान

कपिल मुनि अवतार: सांख्य योग और भक्ति के संगम की कथा !

सुदर्शन चक्र: उत्पत्ति, शक्ति और रहस्य की संपूर्ण कथा !
सुदर्शन चक्र

सुदर्शन चक्र: उत्पत्ति, शक्ति और रहस्य की संपूर्ण कथा !

दत्तात्रेय अवतार: ब्रह्मा, विष्णु व महेश के एक रूप की कथा !
विष्णु

दत्तात्रेय अवतार: ब्रह्मा, विष्णु व महेश के एक रूप की कथा !

भूमि दोष और अस्थिरता से मुक्ति: वराहावतार के तांत्रिक मंत्र !
वराहावतार

भूमि दोष और अस्थिरता से मुक्ति: वराहावतार के तांत्रिक मंत्र !

नंदी अवतार: कान में मनोकामना और शिव वाहन बनने की कथा !
शिव

नंदी अवतार: कान में मनोकामना और शिव वाहन बनने की कथा !

वीरभद्र अवतार: दक्ष यज्ञ विध्वंस और शिव प्रलय की कथा !
वीरभद्र

वीरभद्र अवतार: दक्ष यज्ञ विध्वंस और शिव प्रलय की कथा !