विस्तृत उत्तर
प्राचीन काल में जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार अत्यधिक बढ़ गया और देवता भी उनके आतंक से त्रस्त हो गए, तब सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने असुरों के विनाश के लिए एक अजेय अस्त्र प्राप्त करने का संकल्प लिया। वे कैलाश पर्वत पर गए और वहाँ भगवान शिव की कठोर आराधना की। वे प्रतिदिन एक हजार नामों से शिवजी का स्तवन करते और प्रत्येक नाम के साथ एक नीलकमल पुष्प अर्पित करते। भगवान शिव ने उनकी भक्ति और समर्पण से अत्यंत प्रसन्न होकर उन्हें असुरों का संहार करने के लिए सुदर्शन चक्र वरदान में दिया।
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