विस्तृत उत्तर
लंका युद्ध के दौरान जब रावण का एक पराक्रमी सेनापति मकराक्ष मायावी युद्ध कर रहा था और उसने कथित रूप से वायु और वर्षा के देवताओं को अपने वश में कर लिया था, तब विभीषण ने श्रीराम को परामर्श दिया कि वे वायव्यास्त्र और वरुणास्त्र का संधान करें ताकि मकराक्ष की माया को निष्प्रभावी किया जा सके। यह प्रसंग वायव्यास्त्र की माया-नाशक क्षमताओं की ओर भी संकेत करता है। इस प्रकार वायव्यास्त्र न केवल भौतिक आक्रमण बल्कि मायावी शक्तियों को भी निष्प्रभावी करने में सक्षम था।
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