विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र की सबसे विशिष्ट और भयानक विशेषता यह थी कि यदि लक्ष्य इसका प्रतिरोध करने का प्रयास करता तो इसकी शक्ति और अधिक बढ़ जाती थी। जितना अधिक प्रतिरोध किया जाता यह अस्त्र उतना ही अधिक प्रचंड और विनाशकारी होता जाता था। यह विशेषता इसे अन्य दिव्यास्त्रों से बिल्कुल अलग बनाती है। पारंपरिक युद्ध रणनीतियाँ जैसे जवाबी हमला या प्रतिरक्षा इसके सामने पूर्णतः विफल थीं। महाभारत में भीम ने जब प्रतिरोध किया तो नारायणास्त्र विशेष रूप से उन्हीं को लक्षित करने लगा और पांडवों की एक अक्षौहिणी सेना का नाश होने का वर्णन मिलता है।
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