विस्तृत उत्तर
वायव्यास्त्र का सीधा संबंध वायु के अधिपति देवता पवन देव से है। यह अस्त्र उनकी असीम शक्ति, गति और सर्वव्यापकता का मूर्त रूप माना जाता है। जिस प्रकार वायु अदृश्य रहते हुए भी अपार शक्ति रखती है उसी प्रकार वायव्यास्त्र भी अचानक और व्यापक प्रभाव डालने की क्षमता रखता था। यह संबंध दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय दिव्यास्त्रों की अवधारणा काफी हद तक प्राकृतिक शक्तियों के मानवीकरण और उनके नियंत्रण की आकांक्षा पर आधारित थी। जिस प्रकार वायु जीवन के लिए प्राण के रूप में आवश्यक है उसी प्रकार वायव्यास्त्र भी पवन देव की उस नैसर्गिक शक्ति का विस्तारित रूप था।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





