विस्तृत उत्तर
वायु अग्नि की मित्र है और उसे प्रचंड करने में सहायक होती है। इसी सिद्धांत के अनुरूप वायव्यास्त्र का प्रयोग आग्नेयास्त्र द्वारा उत्पन्न अग्नि को और अधिक भयंकर और विनाशकारी बना सकता था। यह संयोजन शत्रु के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता था। इस प्रकार वायव्यास्त्र केवल स्वतंत्र रूप से नहीं बल्कि आग्नेयास्त्र के साथ मिलकर भी प्रयोग किया जा सकता था जिससे विनाश की क्षमता कई गुना बढ़ जाती थी। यह दिव्यास्त्रों के बीच सहकारी संयोजन का एक अनूठा उदाहरण है।
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