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विस्तृत उत्तर
गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को वायव्यास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्रों का ज्ञान अपने पिता द्रोणाचार्य से विरासत में मिला था। अश्वत्थामा एक शक्तिशाली योद्धा थे और इन अस्त्रों का ज्ञान उन्हें युद्धभूमि में अत्यंत दुर्जेय बनाता था। द्रोणाचार्य स्वयं इन अस्त्रों के प्रकांड ज्ञाता थे और उन्होंने यह ज्ञान अपने पुत्र को भी प्रदान किया। इस प्रकार गुरु-शिष्य और पिता-पुत्र दोनों ही परंपराओं के माध्यम से यह दिव्य ज्ञान अश्वत्थामा को प्राप्त हुआ।
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