विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप का व्यक्तिगत और अत्यंत शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है। यह केवल एक विनाशकारी हथियार नहीं बल्कि धर्म और शरणागति के गूढ़ रहस्यों को भी अपने में समेटे हुए है। इसका महत्व केवल इसकी विनाशकारी क्षमता में ही नहीं बल्कि इसकी अद्वितीय निष्क्रियकरण प्रक्रिया में भी निहित है जो आत्मसमर्पण के महान दर्शन को उजागर करती है। यह त्रिलोकी की अंतिम शक्तियों में से एक माना जाता है। इसकी सबसे अद्भुत बात यह है कि इसका जितना अधिक प्रतिरोध किया जाता है इसकी शक्ति उतनी ही बढ़ती जाती है और इससे बचने का एकमात्र उपाय है पूर्ण आत्मसमर्पण।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





