विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र को निष्क्रिय करने का एकमात्र ज्ञात और अद्वितीय तरीका था शरणागति। लक्ष्य को अपने सभी हथियार त्याग देने होते थे, अपने वाहन जैसे रथ से उतरना होता था और दोनों हाथ जोड़कर पूर्ण रूप से अस्त्र के प्रति आत्मसमर्पण करना होता था। युद्ध के प्राचीन नियमों के अनुसार निहत्थे और शरणागत शत्रु पर प्रहार नहीं किया जाता था और नारायणास्त्र भी इसी दिव्य सिद्धांत का पालन करता प्रतीत होता है। यह निष्क्रियकरण विधि हिंदू धर्म में शरणागति के महत्व को गहराई से दर्शाती है।
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