ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
पढ़िए बालकांड की लीला: क्यों प्रभु राम ने माता कौशल्या को अपने विश्व रूप का दर्शन कराया?
राम

बालकांड की लीला: क्यों प्रभु राम ने माता कौशल्या

📿 पौराणिक•2 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 2 दिसंबर 2024
तुरंत उत्तर

पढ़िए: यह कथा भगवान श्री राम के बाल स्वरूप की दिव्यता और उनकी माता कौशल्या द्वारा देखे गए अद्भुत और अनंत रूप को !

ज्ञान-सार

अगर पूरा पोस्ट नहीं पढ़ना चाहते, तो यह सारांश पढ़ें — इससे आपको सटीक जानकारी मिलेगी।

क्लिक करते ही लेख के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु एक साफ, छोटे और भरोसेमंद सार में दिखेंगे।

WhatsApp
भगवान श्री राम की बाल लीला

एक बार माता ने श्रीरामचंद्रजी को स्नान कराया और सुंदर शृंगार करके उन्हें पालने में बैठा दिया। इसके बाद, अपने कुल के इष्टदेव भगवान की पूजा करने के लिए स्वयं स्नान करने चली गई।

करि पूजा नैवेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा।।
बहुरि मातु तहँ वा चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई।।

पूजा करके नैवेद्य चढ़ाया और स्वयं वहाँ चली गईं जहाँ रसोई बनाई जा रही थी।
फिर माता कौशल्या वापस उसी स्थान पर लौटीं और वहाँ पहुँचकर देखा कि भगवान राम, इष्टदेव को चढ़ाए गए प्रसाद को खा रहे हैं।

गई जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।
बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।

माता कौशल्या भयभीत होकर शिशु के पास गईं कि इसे कौन यहाँ लाकर बैठा दिया है। यह सोचकर वे तुरंत पुत्र के पास पहुँचीं और वहाँ पालने में बालक को फिर से सोया हुआ देखा।
फिर वे पूजा के स्थान पर वापस आईं और देखा कि वही पुत्र वहाँ भोजन कर रहा है। इस दृश्य से उनके हृदय में कंपन होने लगा और मन में धैर्य नहीं रहा।

इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मति भ्रम मोर कि आन बिसेषा।।
देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।

माता कौशल्या ने सोचा कि यहाँ पालने में और वहाँ पूजा के स्थान पर मैंने दो बालक देखे।
यह मेरी बुद्धि का भ्रम है या कोई और विशेष अलौकिक कारण है? माता कौशल्या को घबराई हुई देखकर प्रभु राम ने मधुर मुस्कान से हँस दिया।

दो०—देखरावा मातुहि निज अद्भुत रूप अखंड।
रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मांड।।201।।

फिर उन्होंने माता को अपना अखंड अद्भुत रूप दिखाया, जिसके एक-एक रोम में करोड़ों-करोड़ों ब्रह्मांड स्थित थे।

अगिनत रबि ससि सिव चतुरानन।
बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।।
काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ।
सोउ देखा जो सुना न काऊ।।1।।

अनगिनत सूर्य, चंद्रमा, शिव, ब्रह्मा, बहुत से पर्वत, नदियाँ, समुद्र, पृथ्वी, वन, काल, कर्म, गुण, ज्ञान और स्वभाव देखे; और वे पदार्थ भी देखे जो कभी सुने भी न थे।
सब प्रकार से बलवती माया को देखा कि वह भगवान के सामने अत्यंत भयभीत हाथ जोड़े खड़ी है। जीव को देखा, जिसे वह माया नचाती है; और फिर भक्ति को देखा, जो उस जीव को माया से छुड़ा देती है। माता का शरीर पुलकित हो गया, मुख से वचन नहीं निकला। तब आँखें मूंदकर उसने श्रीरामजी के चरणों में सिर नवाया।> माता को आश्चर्यचकित देखकर श्रीरामजी फिर बाल रूप हो गए।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

लोक

सरमा कौन थीं?

सरमा इंद्र की दूती और देवशुनी थीं, जिन्हें पणियों द्वारा छिपाई गई दिव्य गौओं की खोज के लिए रसातल भेजा गया था।

लोक

सरमा के मंत्रमय वचनों से असुर क्यों डरते हैं?

सरमा के मंत्रमय वचनों ने पणियों के भीतर इंद्र का भय बैठा दिया, इसलिए वे आज भी गुफाओं से बाहर निकलने से डरते हैं।

लोक

सरमा और पणियों की कथा क्या है?

पणियों ने देवताओं की गौओं को रसातल में छिपाया; सरमा ने उन्हें खोजा, लालच ठुकराया और पणियों को इंद्र के दंड की चेतावनी दी।

लोक

सरमा रसातल क्यों गई थीं?

सरमा इंद्र के आदेश से पणियों द्वारा चुराई गई देवताओं की गौओं को खोजने रसातल गई थीं।

दिव्यास्त्र

श्रीराम को आग्नेयास्त्र कैसे मिला?

श्रीराम को आग्नेयास्त्र उनके गुरु महर्षि विश्वामित्र से मिला था जो उन्हें राक्षसों से यज्ञ की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए दिया गया था।

📚 इसे भी पढ़ें

देवी महामाया: त्रिदेवों की आराध्य और 10 महाविद्याओं की जननी !
महामाया

देवी महामाया: त्रिदेवों की आराध्य और 10 महाविद्याओं की जननी !

ब्रह्मास्त्र: उत्पत्ति, प्रथम प्रयोगकर्ता और विनाश की गाथा !
ब्रह्मास्त्र

ब्रह्मास्त्र: उत्पत्ति, प्रथम प्रयोगकर्ता और विनाश की गाथा !

माया और योगमाया: स्वरूप, अंतर और गूढ़ रहस्य !
योगमाया

माया और योगमाया: स्वरूप, अंतर और गूढ़ रहस्य !

पढ़िए: कैसे प्रभु राम ने रावण जितने ही पराक्रमी खर और दूषण को उनकी 14,000 सेना सहित वध कर दिया ?
राम

पढ़िए: कैसे प्रभु राम ने रावण जितने ही पराक्रमी खर और दूषण को उनकी 14,000 सेना सहित वध कर दिया ?

श्रीराम ने माता शबरी को कौन सी 9 प्रकार की भक्ति के बारे में बताया? जो प्रभु को प्रिय है !
श्रीराम

श्रीराम ने माता शबरी को कौन सी 9 प्रकार की भक्ति के बारे में बताया? जो प्रभु को प्रिय है !

पढ़िए अरण्य कांड – पंचम संस्करण: कौन था विराध राक्षस और कैसे श्रीराम-लक्ष्मण ने उसे दिया मोक्ष?
अरण्य कांड

पढ़िए अरण्य कांड – पंचम संस्करण: कौन था विराध राक्षस और कैसे श्रीराम-लक्ष्मण ने उसे दिया मोक्ष?

पढ़िए: अरण्यकाण्ड का तृतीय संस्कारण-अत्रि मुनि द्वारा प्रभु श्रीराम की वो स्तुति, जिसे पढ़ते ही सारे पाप जल जाते हैं!
श्रीराम

पढ़िए: अरण्यकाण्ड का तृतीय संस्कारण-अत्रि मुनि द्वारा प्रभु श्रीराम की वो स्तुति, जिसे पढ़ते ही सारे पाप जल जाते हैं!

ब्रह्मांड रहस्य: 14 लोकों और माया के परे आखिर क्या है?
परमधाम

ब्रह्मांड रहस्य: 14 लोकों और माया के परे आखिर क्या है?

पढ़िए "अरण्यकाण्ड" का प्रथम संस्करण: जब एक तिनका बना ब्रह्मास्त्र—क्या हुआ जब देवराज इन्द्र के पुत्र ने लिया श्रीराम से बैर?
राम

पढ़िए "अरण्यकाण्ड" का प्रथम संस्करण: जब एक तिनका बना ब्रह्मास्त्र—क्या हुआ जब देवराज इन्द्र के पुत्र ने लिया श्रीराम से बैर?

पढ़िए अरण्यकांड भाग 9 – मारीच की माया, स्वर्ण मृग की अद्भुत लीला और रावण का कपटपूर्ण षड्यंत्र !
अरण्यकांड

पढ़िए अरण्यकांड भाग 9 – मारीच की माया, स्वर्ण मृग की अद्भुत लीला और रावण का कपटपूर्ण षड्यंत्र !

पढ़िए अरण्यकांड भाग 8 – जब अगस्त्य मुनि ने प्रभु श्रीराम को सौंपे दिव्यास्त्र और शुरू हुआ राक्षसों के विनाश का अध्याय
अरण्यकांड

पढ़िए अरण्यकांड भाग 8 – जब अगस्त्य मुनि ने प्रभु श्रीराम को सौंपे दिव्यास्त्र और शुरू हुआ राक्षसों के विनाश का अध्याय

पढ़िए अरण्य कांड भाग 7 – जब श्रीराम मिले सुतीक्ष्ण मुनि से और लिया पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करने का संकल्प !
अरण्य कांड

पढ़िए अरण्य कांड भाग 7 – जब श्रीराम मिले सुतीक्ष्ण मुनि से और लिया पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करने का संकल्प !