विस्तृत उत्तर
भगवान श्रीराम के धनुष का नाम 'कोदंड' था। यह उनका निजी, नित्य-धारण करने वाला दिव्य धनुष था।
कोदंड' का अर्थ होता है — 'बांस से निर्मित'। यह धनुष अत्यंत दिव्य और चमत्कारिक था जिसे केवल भगवान राम ही धारण और संचालित कर सकते थे। इस धनुष की विशेषता यह थी कि एक बार इस पर बाण चढ़ाने पर वह लक्ष्य भेदकर ही वापस आता था। इसीलिए श्रीराम को 'कोदंडी' भी कहा जाता है।
कोदंड धनुष के साथ कुछ भ्रम अक्सर होता है, इसलिए स्पष्ट करना जरूरी है — जनक के स्वयंवर में श्रीराम ने शिव का धनुष 'पिनाक' तोड़ा था, वह कोदंड नहीं था। और जब परशुराम ने राम से वैष्णव धनुष (शार्ङ्ग) पर प्रत्यंचा चढ़ाने को कहा, वह भी कोदंड से भिन्न था।
कोदंड के बारे में एक मत यह है कि श्रीराम ने इसे दंडकारण्य वन में स्वयं निर्मित किया था। इस धनुष से उन्होंने मारीच, सुबाहु, विराध, कुंभकर्ण जैसे राक्षसों का वध किया। इस धनुष के नाम पर 'कोदंड रामालयम' नाम के मंदिर भी भारत में स्थित हैं।





