विस्तृत उत्तर
रामायण में पाशुपतास्त्र के विषय में कई मत उपलब्ध हैं और इस पर पुराणों में कुछ मतभेद है।
पाशुपतास्त्र भगवान शिव का सर्वोच्च दिव्यास्त्र है। यह केवल उन्हीं को प्राप्त होता है जो शिव की कठोर साधना और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। इस अस्त्र के धारकों में शिव स्वयं के अतिरिक्त मेघनाद (इंद्रजीत), परशुराम और विश्वामित्र का नाम भी आता है।
एक मत के अनुसार, महर्षि विश्वामित्र के पास पाशुपतास्त्र था और उन्होंने राम को जो दिव्यास्त्र दिए उनमें शिव के शूल का उल्लेख है — इसे कुछ विद्वान पाशुपतास्त्र से जोड़ते हैं।
महाभारत में स्पष्ट रूप से पाशुपतास्त्र अर्जुन को शिव ने स्वयं दिया था — यह एकदम प्रमाणित है। रामायण में राम का पाशुपतास्त्र धारण उतने स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं है।
इसलिए सबसे प्रामाणिक मत यही है — रामायण में विश्वामित्र ने राम को शिव संबंधी अस्त्र दिया था, और महाभारत में पाशुपतास्त्र का सबसे प्रसिद्ध वरण अर्जुन द्वारा किया गया है।





