विस्तृत उत्तर
चंद्रहास' संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'चंद्र' और 'हास'।
चंद्र' का अर्थ है — चंद्रमा। 'हास' का अर्थ है — हँसी, हास्य, चमक, या प्रकाश।
इस प्रकार 'चंद्रहास' का पूर्ण अर्थ है — 'चंद्रमा की हँसी जैसी चमकदार' या 'चंद्रमा के समान दीप्तिमान तलवार'। यह नाम इस तलवार के स्वरूप और उसकी शोभा को बखूबी दर्शाता है।
तलवार का आकार अर्धचंद्र की तरह घुमावदार था जो चंद्रमा की हँसी (crescent shape) जैसा दिखता था। इसकी धार इतनी तीखी और चमकदार थी कि यह चंद्रमा के प्रकाश जैसी दिखती थी।
विक्षनरी में चंद्रहास के अर्थ में यह भी लिखा है — खड्ग (तलवार) और रावण की तलवार का नाम। तुलसीदास रचित रामचरितमानस में सीता जी के विरह प्रसंग में 'चंद्रहास हर मम परितापं' (हे चंद्रहास! मेरा दाह दूर कर) जैसा उल्लेख मिलता है — जहाँ चंद्रहास से राम का भी अर्थ निकाला जाता है क्योंकि राम की मुस्कान भी चंद्र-हास (चंद्रमा की हँसी) जैसी है।





