विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्म में युद्ध के नियम अत्यंत सुव्यवस्थित थे। महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए जो नियम बनाए गए वे इस परंपरा के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं।
समान वर्ग में युद्ध — रथी केवल रथी से, पैदल केवल पैदल से, हाथी पर बैठा योद्धा हाथी पर बैठे से, अश्वारोही अश्वारोही से लड़ेगा।
वर्जित कार्य — निरस्त्र (हथियार-रहित) योद्धा पर वार नहीं। सोए हुए, असावधान, मतवाले, पागल योद्धा पर वार नहीं। रथहीन योद्धा पर वार नहीं। स्त्री, बालक और वृद्ध पर वार नहीं। युद्ध से पलायन कर रहे पर पीछे से वार नहीं। जो युद्ध न कर रहा हो उस पर वार नहीं।
एक पर एक — एक योद्धा पर एक से अधिक योद्धाओं का एक साथ हमला धर्म के विरुद्ध था। अभिमन्यु वध में इसी नियम का उल्लंघन हुआ था।
संध्याकाल — सूर्यास्त होने पर युद्ध समाप्त हो जाता था (14वें दिन रात्रि युद्ध अपवाद था)।
सम्मान — युद्ध में शरण माँगने वाले को मारना वर्जित था। युद्ध क्षेत्र में छोड़ा गया अस्त्र उठाने का अवसर देना होता था।





