विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह महाभारत के सबसे वरिष्ठ और असाधारण योद्धा थे। उनके पास अनेक दिव्य अस्त्र थे।
ज्ञान का स्रोत — भीष्म ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देवगुरु बृहस्पति, दैत्यगुरु शुक्राचार्य, ऋषि वशिष्ठ और ऋषि च्यवन से ली। समस्त युद्धकला और अस्त्र-शस्त्र विद्या उन्होंने अपने गुरु परशुराम से प्राप्त की जिनसे उनका 23 दिवसीय महायुद्ध भी हुआ।
प्रमुख अस्त्र — ब्रह्मास्त्र: परशुराम से प्राप्त। प्रस्वापनास्त्र: नींद लाने वाला शक्तिशाली अस्त्र — यह इस batch में आगे विस्तृत है। वरुण-अग्नि आदि देवों के समस्त मूलभूत दिव्यास्त्र उनके पास थे। 5 अभिमंत्रित स्वर्ण तीर — दुर्योधन के आग्रह पर बनाए जो पांडवों का नाश कर सकते थे; श्रीकृष्ण की चाल से वे अर्जुन को मिल गए।
भीष्म-परशुराम युद्ध में स्थिति — जब परशुराम हावी हो गए और भीष्म रथ पर गिर गए, तब वसुओं और माता गंगा ने भीष्म को प्रस्वापनास्त्र का स्मरण कराया। परशुराम के पास इस अस्त्र का कोई उत्तर नहीं था — इसीलिए उन्होंने पूर्वजों के अनुरोध पर युद्ध से विरत होना स्वीकार किया।





