विस्तृत उत्तर
परशुराम विष्णु के छठे अवतार और अस्त्र-शस्त्र विद्या के सर्वोच्च आचार्य थे। उनके पास अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे।
प्रमुख शस्त्र — परशु (विद्युदभि फरसा): शिव से प्राप्त, उनका सबसे प्रसिद्ध और निजी शस्त्र। इसी से उनका नाम परशुराम पड़ा।
प्रमुख धनुष — शार्ङ्ग: महर्षि ऋचीक (जो विष्णु से प्राप्त था) से मिला। यह भगवान विष्णु का दिव्य धनुष था। विजय धनुष: देवराज इंद्र से मिला, जो बाद में कर्ण को दिया।
दिव्यास्त्र — ब्रह्मास्त्र: यह उनके पास था जो उन्होंने द्रोणाचार्य को दिया। परशुराम ने द्रोण को जीवनभर की कमाई में से अपने सभी अस्त्र-शस्त्र मंत्रों सहित दे दिए थे। पाशुपतास्त्र: भगवान शिव के परम भक्त होने के कारण यह भी उनके पास था। इसके अतिरिक्त वैष्णवास्त्र, नारायणास्त्र, और अन्य दिव्यास्त्र भी थे।
परशुराम स्वयं अस्त्र-शास्त्र परंपरा के आचार्य थे — उन्होंने भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को शस्त्र-शिक्षा दी। उनका जीवन शस्त्र और शास्त्र दोनों के उत्कृष्ट संयोजन का उदाहरण है।





