विस्तृत उत्तर
कुरुक्षेत्र का 18 दिवसीय युद्ध दिव्यास्त्रों का महासमर था। इसमें अनेक दुर्लभ और संहारक अस्त्रों का प्रयोग हुआ।
प्रमुख दिव्यास्त्र — ब्रह्मास्त्र: द्रोण, अश्वत्थामा, अर्जुन द्वारा। नारायणास्त्र: अश्वत्थामा ने 14वें दिन पांडव सेना पर चलाया। पाशुपतास्त्र: अर्जुन ने 14वें दिन जयद्रथ वध में। वासवी शक्ति (अमोघशक्ति): कर्ण ने घटोत्कच पर। अंजलिकास्त्र: अर्जुन ने 17वें दिन कर्ण वध में। इंद्रास्त्र: अर्जुन ने 14वें और 17वें दिन। वायव्यास्त्र: अश्वत्थामा ने 14वें दिन। आग्नेयास्त्र और वरुणास्त्र: विभिन्न योद्धाओं द्वारा।
विशेष प्रसंग — भगदत्त ने वैष्णवास्त्र चलाया जिसे कृष्ण ने स्वयं अपने ऊपर लेकर अर्जुन की रक्षा की। अर्जुन ने पर्जन्यास्त्र से भीष्म के लिए जल निकाला। द्रोण ने नाना प्रकार के दिव्यास्त्र चलाए।
ब्रह्मशिरास्त्र और नारायणास्त्र के प्रयोग ने यह युद्ध अत्यंत विनाशकारी बना दिया। 45 लाख से अधिक सैनिक मारे गए और केवल 18 योद्धा जीवित बचे।





