विस्तृत उत्तर
अर्जुन के धनुष का नाम 'गांडीव' था। यह महाभारत काल के सबसे प्रसिद्ध और सर्वाधिक चर्चित दिव्य धनुषों में से एक है।
गांडीव को विश्वकर्मा ने बनाया था — वही तीन महान धनुष जो उन्होंने निर्मित किए: पिनाक (शिव का), शार्ङ्ग (विष्णु का) और गांडीव। गांडीव 65 अंगुल लंबा था और अत्यंत भारी था जिसे केवल विशेष योद्धा ही धारण कर सकते थे।
गांडीव की विशेषताएं — एक साथ अनेक तीर छोड़े जा सकते थे, इसे एक लाख धनुषों के बराबर माना जाता था, इसमें 108 दिव्य प्रत्यंचाएं थीं जो कभी कट नहीं सकती थीं, इसकी टंकार से पूरा युद्धक्षेत्र गूँज उठता था और इससे छूटा बाण अपने लक्ष्य को भेदकर ही लौटता था।
गांडीव के साथ अग्निदेव ने अर्जुन को अक्षय तरकश भी दिया था जिसमें बाण कभी समाप्त नहीं होते थे। महाभारत युद्ध के अंत में अर्जुन ने यह धनुष अग्निदेव को वापस कर दिया जिन्होंने इसे वरुण को लौटाया।





