विस्तृत उत्तर
श्रीराम के तूणीर (तरकश) के विषय में पुराणों में 'अक्षय तूणीर' का उल्लेख मिलता है, हालांकि वाल्मीकि रामायण में इसका कोई विशेष नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया।
अक्षय तूणीर' का अर्थ है — अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) + तूणीर (तरकश)। परंपरा के अनुसार राम के तूणीर में बाण कभी समाप्त नहीं होते थे — वे कितने भी बाण चलाएं, तरकश सदा भरा रहता था।
राम रक्षा स्तोत्र में 'सासितूणधनुर्बाणपाणिं' का उल्लेख है — अर्थात जिनके हाथ में खड्ग, तूणीर, धनुष और बाण हैं — यहाँ तूणीर का स्पष्ट संदर्भ है।
अक्षय तूणीर की समांतरता — महाभारत में अर्जुन के पास अग्निदेव का दिया अक्षय तरकश था। उसी प्रकार रामायण परंपरा में राम के तरकश को भी अक्षय माना गया है।
यह ध्यान योग्य है कि वाल्मीकि रामायण में तरकश का विशेष नाम उपलब्ध नहीं है — 'अक्षय तूणीर' मुख्यतः परवर्ती परंपराओं और भक्ति साहित्य में प्रयुक्त होता है। राम के धनुष का नाम कोदंड था और तरकश को 'अक्षय तूणीर' की संज्ञा दी जाती है।





