विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र अत्यंत दुर्लभ था — यह बहुत कम लोगों के पास था।
मूल अधिकारी — भगवान शिव के पास यह मूल अस्त्र था। उन्होंने इसे स्वयं आदि पराशक्ति से सृष्टि से पहले ही प्राप्त किया था।
महाभारत में — महाभारत युद्ध से पहले शिव ने किरात-अवतार में अर्जुन की परीक्षा ली। अर्जुन के पराक्रम से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पाशुपतास्त्र प्रदान किया। शिव ने कहा — 'यह अस्त्र किसी भी मनुष्य, देवता, यम, यक्ष, वरुण — किसी के भी पास नहीं है।' अर्जुन को यह मन से, नेत्र से, वाणी से और धनुष से — चारों प्रकार से चलाने की विधि सिखाई गई।
रामायण में — श्रीराम के पास पाशुपतास्त्र था। मेघनाद (इंद्रजित) के पास भी इसका उल्लेख कुछ परंपराओं में मिलता है। रावण-पुत्र मेघनाद ने ब्रह्मदंड अस्त्र, नारायणास्त्र और पाशुपतास्त्र — तीनों पर विजय प्राप्त की थी।





