विस्तृत उत्तर
महाभारत के वन पर्व में जब अर्जुन आसन्न युद्ध के लिए दिव्यास्त्र प्राप्त करने हेतु महान तपस्या पर निकले तो उनकी यात्रा उन्हें स्वर्गलोक तक ले गई। भगवान शिव को प्रसन्न कर पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के बाद अर्जुन से मिलने के लिए स्वयं चारों लोकपाल — इंद्र, वरुण, यम और कुबेर — उपस्थित हुए। इसी दिव्य सभा में धन के देवता और यक्षों के राजा कुबेर ने अर्जुन को अपना 'परम प्रिय' अस्त्र अंतर्धान अस्त्र प्रदान किया।
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