विस्तृत उत्तर
भगवान कृष्ण इस खतरे से भली-भांति परिचित थे और उन्होंने अर्जुन को इस शक्ति से बचाना अपना प्राथमिक मिशन बना लिया था। युद्ध के पहले 13 दिनों तक कृष्ण ने रणनीतिक रूप से अर्जुन के रथ को कर्ण के साथ एक पूर्ण टकराव से दूर रखा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि कृष्ण ने स्वयं सात्यकि के समक्ष यह स्वीकार किया कि वे अपनी दिव्य शक्ति का उपयोग करके कर्ण के मन को 'मोहित' या भ्रमित किए रहते थे, ताकि अवसर आने पर भी वह अर्जुन पर शक्ति का प्रयोग करने के बारे में न सोचे।
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