विस्तृत उत्तर
घटोत्कच की मृत्यु कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि कृष्ण द्वारा रची गई एक रणनीतिक कुर्बानी थी। उसे युद्ध में लड़ने के लिए नहीं, बल्कि मरने के लिए भेजा गया था, ताकि वह अर्जुन के लिए बने उस घातक प्रहार को स्वयं पर ले सके। कृष्ण जानते थे कि घटोत्कच रात में इतना भयावह होगा कि कर्ण के पास वासवी शक्ति चलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इस प्रकार कृष्ण ने नियति का विरोध नहीं किया; उन्होंने इसके एक उपकरण के रूप में कार्य करते हुए घटनाओं को उनके अपरिहार्य निष्कर्ष तक कुशलतापूर्वक निर्देशित किया।
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